झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 10 साल से संविदा पर काम कर रहे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ
झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे नौ कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने और नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने 14 अगस्त 2024 के उस विभागीय आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग खारिज की गई थी। मामले में याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय तक लगातार सेवा देने का हवाला दिया था।
UNITED NEWS OF ASIA. झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे नौ कर्मचारियों के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने और उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने 14 अगस्त 2024 के उस विभागीय आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके माध्यम से कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद लंबे समय से संविदा आधार पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के लिए राहत की स्थिति बनी है।
मामले में अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि संबंधित कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय तक लगातार अपनी सेवाएं दी हैं। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से अधिक समय तक बिना किसी ब्रेक के सेवा की। ऐसे में केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर उन्हें सेवा से अलग करना उचित नहीं माना गया। अदालत ने विभाग को आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर सभी नौ याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल करने और नियमितीकरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
मामले से जुड़े कर्मचारियों में धरो उरांव, अरुण कुमार साहू, गौतम प्रसाद सिंह, आशीष रंजन, प्रदीप बड़ा, विष्णु देव शाह, अरविंद कुमार सिंह, अजय रजक और संतोष कुमार राम शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इन कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2004 से 2008 के बीच अलग-अलग पदों पर हुई थी। इनमें टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट, क्लर्क, ड्राइवर और पंप ऑपरेटर के पद शामिल थे। कर्मचारियों को जनवरी 2017 तक मानदेय का भुगतान किया गया, जिसके बाद बिना किसी औपचारिक आदेश के उन्हें काम से रोक दिया गया। विभागीय स्तर पर की गई गुहार से समाधान नहीं होने के बाद कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले में अमृतांश वत्स ने कर्मचारियों की ओर से पक्ष रखा।
इसी बीच झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड से जुड़े संविदा चालकों के मामले का भी उल्लेख सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने लंबे समय से लगातार सेवा दे रहे चालकों के नियमितीकरण और संबंधित लाभों के मामले में राहत दी है। वर्ष 2008 में चयन प्रक्रिया के बाद इंद्रदेव सिंह समेत 29 चालक लगातार सेवा कर रहे हैं। अदालत के समक्ष यह तर्क रखा गया कि केवल स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं होने के आधार पर लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों की सेवा को समाप्त नहीं माना जा सकता। अदालत ने मामले में नियुक्तियों की प्रकृति को अनियमित और अवैध नियुक्ति के बीच अंतर के संदर्भ में भी देखा।
झारखंड हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जस्टिस दीपक रोशन को वर्तमान न्यायाधीशों में शामिल बताया गया है और अदालत की वेबसाइट पर नियमितीकरण से जुड़े मामलों की कार्यवाही भी सूचीबद्ध है।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट का छह सप्ताह के भीतर बहाली और नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश अब विभाग के लिए अगला कदम तय करता है। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को सेवा में वापस लेने और नियमितीकरण की औपचारिक कार्रवाई पूरी करने की प्रक्रिया शुरू की जानी है।