दुर्गा पूजा में नॉनवेज न खाने की धीरेंद्र शास्त्री की अपील पर बंगाल BJP का पलटवार, कहा- कोई बाहरी तय नहीं करेगा

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले खान-पान को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। कोलकाता में कथा वाचन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज भोजन से परहेज करने की अपील की। इस पर बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बंगाल के खान-पान और परंपराओं का फैसला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता।

Sep 8, 2026 - 14:10
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दुर्गा पूजा में नॉनवेज न खाने की धीरेंद्र शास्त्री की अपील पर बंगाल BJP का पलटवार, कहा- कोई बाहरी तय नहीं करेगा

UNITED NEWS OF ASIA. कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के आगाज से पहले ही नॉनवेज भोजन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज भोजन नहीं खाने की अपील पर बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों के खान-पान और पहनावे का फैसला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता।

दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री ने कोलकाता में कथा वाचन के दौरान पश्चिम बंगाल के लोगों से अपील की कि दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज भोजन से परहेज किया जाए। उनकी इस अपील के बाद बंगाल की राजनीति में इसे लेकर बहस शुरू हो गई। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को शाकाहार अपनाने की अपील करने का अधिकार है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत मान्यता बंगाली समाज पर थोपी नहीं जा सकती।

समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के बाहर से आने वाला कोई भी व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि बंगाल के लोग क्या खाएं या क्या पहनें। उन्होंने बंगाल की खान-पान की परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि यहां भोजन और धार्मिक संस्कृति का अपना अलग इतिहास रहा है। उनके मुताबिक, बंगाली समाज अपनी पारंपरिक मान्यताओं और खान-पान के अनुसार ही आगे बढ़ता आया है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में बंगाली परिवारों में नॉनवेज भोजन की परंपरा रही है। उन्होंने मां काली की पूजा से जुड़ी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल में कई धार्मिक अवसरों पर बकरे के मांस का भोग लगाए जाने की परंपरा भी रही है।

समिक भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि अष्टमी और नवमी से जुड़े पारंपरिक भोजन में भी अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की अपनी मान्यताएं हैं। उन्होंने साफ किया कि बंगाली समाज वही भोजन करेगा, जो वह अपनी परंपरा और पसंद के अनुसार करता आया है।

उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी धर्मगुरु को अपनी मान्यता व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन उसे बंगाल के लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति के कहने से बंगालियों की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं नहीं बदलने वाली हैं।

इस विवाद के बीच बंगाल की स्थानीय संस्कृति और खान-पान की परंपराएं एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। एक ओर धीरेंद्र शास्त्री की अपील धार्मिक दृष्टिकोण से सामने आई है, वहीं समिक भट्टाचार्य ने इसे बंगाल की सांस्कृतिक स्वतंत्रता और पारंपरिक खान-पान से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी है।

दुर्गा पूजा बंगाल का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है। ऐसे में त्योहार से पहले खान-पान को लेकर सामने आए इस बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया ने राज्य में नई बहस छेड़ दी है।