राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, पीएम मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में समन रद्द करने से इनकार

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने 2019 में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया। मामला 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़ा है।

Sep 8, 2026 - 13:32
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राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, पीएम मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में समन रद्द करने से इनकार

UNITED NEWS OF ASIA. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ मजिस्ट्रेट की ओर से अगस्त 2019 में जारी किए गए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह मामला वर्ष 2018 में राजस्थान में आयोजित एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़ा हुआ है।

दरअसल, बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने राहुल गांधी के खिलाफ गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि सितंबर 2018 में राजस्थान की एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक टिप्पणी की थी। इसी शिकायत के आधार पर मजिस्ट्रेट अदालत ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन जारी होने के बाद राहुल गांधी ने इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जुलाई 2021 में समन मिलने के बाद दाखिल याचिका में राहुल गांधी की ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। उनकी दलील थी कि उन्होंने किसी राजनीतिक दल का नाम लेकर टिप्पणी नहीं की थी और न ही किसी ऐसे निश्चित या पहचान योग्य वर्ग को निशाना बनाया था, जिसे कानूनी तौर पर पीड़ित पक्ष माना जा सके।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रथम दृष्टया अपराध का मामला बनता है। इस वजह से इस स्तर पर हाईकोर्ट द्वारा मामले को रद्द करने की शक्ति सीमित है। वकील की ओर से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 199 और भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के प्रावधानों का भी हवाला दिया गया।

मामले की सुनवाई कर रहे बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस नितिन बोरकर ने राहुल गांधी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बीजेपी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है और इसे निश्चित रूप से पहचान योग्य संस्था माना जा सकता है। अदालत के अनुसार, इस स्तर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी की टिप्पणी से बीजेपी और उससे जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। वहीं राहुल गांधी की ओर से लगातार यह दलील दी गई है कि कथित टिप्पणी किसी निश्चित व्यक्ति या पहचान योग्य समूह के खिलाफ नहीं थी।

हाईकोर्ट द्वारा समन रद्द करने से इनकार किए जाने के बाद अब निचली अदालत में चल रही मानहानि की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। हालांकि, अदालत का यह आदेश मामले के अंतिम दोष या निर्दोष होने का फैसला नहीं है, बल्कि इस स्तर पर समन को रद्द करने की राहुल गांधी की मांग पर निर्णय है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में जारी रहेगी।