छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग, राजभवन पहुंचे भाषाविद्; राज्यपाल ने समिति गठन की कही बात

छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर भाषाविदों ने राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की। राज्यपाल ने भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश समेत संदर्भ सामग्री के व्यवस्थित संकलन के लिए समिति गठित करने की बात कही।

Sep 8, 2026 - 14:25
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छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग, राजभवन पहुंचे भाषाविद्; राज्यपाल ने समिति गठन की कही बात

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने मंगलवार को लोक भवन में राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। भाषाविदों ने राज्यपाल के सामने भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक परंपरा और वर्तमान में इसके उपयोग से संबंधित जानकारी भी रखी।

भाषाविदों के अनुसार छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ की राजभाषा होने के साथ ही प्रदेश की प्रमुख संपर्क भाषाओं में शामिल है। करीब 2 करोड़ लोग छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग करते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में सदियों से साहित्य सृजन की परंपरा रही है और इसकी अपनी समृद्ध भाषाई एवं साहित्यिक विरासत है।

मुलाकात के दौरान भाषाविदों ने छत्तीसगढ़ी भाषा के व्याकरण, शब्दकोश और मानकीकरण की प्रक्रिया से राज्यपाल को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा का व्याकरण वर्ष 1890 में तैयार किया गया था, जबकि पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वहीं, वर्ष 1924 में छत्तीसगढ़ी का पहला उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ था।

प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ी साहित्य की विविधता का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक 15वीं शताब्दी से ही छत्तीसगढ़ी में साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना और पत्रकारिता जैसी विभिन्न विधाओं में छत्तीसगढ़ी साहित्य की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ के प्रकाशन का भी उल्लेख किया गया।

राज्यपाल रमेन डेका ने इस विषय पर पहल करते हुए भाषाविदों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और उसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल का संकेत दिया। राज्यपाल ने कहा कि इस विषय के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित तरीके से संकलन करेगी।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि समिति के माध्यम से विषय के विद्वानों और विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव लिए जाएंगे। इस दौरान उन्होंने असमिया और बोडो भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।

भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी भाषा का अध्ययन कराया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

मुलाकात के दौरान भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और अर्चना पाठक उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग के बीच राज्यपाल की ओर से समिति गठन की पहल को भाषा संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।