टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई ताकत, जशपुर में 60 टीबी मरीजों को पोषण सहायता देकर मिसाल बने निरंजन गुप्ता

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जशपुर जिले में जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने निक्षय मित्र बनकर 19 विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) मरीजों सहित 60 टीबी रोगियों को पोषण सहायता और आवश्यक सहयोग प्रदान किया। उनकी पहल से मरीजों को नियमित उपचार जारी रखने, बेहतर पोषण प्राप्त करने और टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली। उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

Aug 6, 2026 - 15:36
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टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई ताकत, जशपुर में 60 टीबी मरीजों को पोषण सहायता देकर मिसाल बने निरंजन गुप्ता

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l टीबी केवल एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि कुपोषण, आर्थिक कमजोरी और सामाजिक चुनौतियों से जुड़ी गंभीर समस्या भी है। इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए नियमित दवा के साथ पौष्टिक भोजन और सामाजिक सहयोग भी उतना ही आवश्यक होता है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत शुरू की गई निक्षय मित्र पहल जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने इस अभियान के तहत प्रेरणादायक कार्य करते हुए 19 विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) मरीजों सहित कुल 60 टीबी रोगियों को गोद लेकर उन्हें नियमित पोषण सहायता और आवश्यक सहयोग प्रदान किया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभानी शुरू की। उन्होंने दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले टीबी मरीजों तक पहुंचकर न केवल उन्हें पोषण किट उपलब्ध कराई, बल्कि उपचार के दौरान उनका लगातार मनोबल भी बढ़ाया। उनका प्रयास इस बात का उदाहरण है कि समाज की भागीदारी से टीबी जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ी जा सकती है।

जशपुर जिले के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित होने के कारण टीबी की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में मरीज अक्सर आर्थिक अभाव और जागरूकता की कमी के कारण उपचार अधूरा छोड़ देते हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निरंजन गुप्ता ने मरीजों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध कराई, स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया और उपचार को बीच में न छोड़ने के लिए लगातार प्रेरित किया।

उनकी पहल केवल पोषण किट वितरण तक सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर जाकर मरीजों और उनके परिवारों को टीबी के लक्षण, संक्रमण से बचाव, नियमित दवा सेवन और उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत संवाद का सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग समय पर जांच तथा उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।

विशेषज्ञों के अनुसार टीबी और कुपोषण का गहरा संबंध है। कुपोषण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे टीबी का खतरा बढ़ जाता है। वहीं टीबी होने पर शरीर और अधिक कमजोर हो जाता है। ऐसे में पौष्टिक आहार उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। निक्षय मित्र द्वारा दी गई पोषण सहायता मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार लाने और उपचार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

निरंजन प्रसाद गुप्ता के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका कार्य इस बात का प्रमाण है कि यदि एक व्यक्ति भी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे आए तो वह अनेक जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन यदि निक्षय मित्र बनकर इस अभियान से जुड़ें, तो कोई भी टीबी मरीज पोषण या संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित नहीं रहेगा। जशपुर की यह प्रेरक पहल समाज के लिए संवेदनशीलता, सेवा और सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।