अपने दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री ने नवरात्रि के अंतिम दिन मां माँ दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात वे सीधे पुनर्वास केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने युवाओं के साथ बैठकर उनके अनुभव, आवश्यकताओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की।
केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं ने बताया कि वे प्रशिक्षण के बाद अपने गांव लौटकर खेती-किसानी के माध्यम से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। इस पर उपमुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि इच्छुक युवाओं को कृषि से संबंधित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपने जीवन को नई दिशा दे सकें।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का मुख्य उद्देश्य युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने अन्य साथियों को भी पुनर्वास कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
उन्होंने पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, भोजन व्यवस्था और प्रशिक्षण गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। युवाओं द्वारा स्वयं भोजन बनाने की इच्छा जताने पर उन्होंने अनुमति प्रदान करते हुए कहा कि इच्छुक युवा स्वेच्छा से यह कार्य कर सकते हैं, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता की भावना और मजबूत होगी।
इसके अलावा उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पुनर्वासित युवाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाए और केंद्र से बाहर जाने से पहले उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युवाओं के परिजन या परिचित जेल में निरुद्ध हैं, तो उन्हें भी पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयास किए जाएं।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में इस केंद्र में कुल 107 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें 60 बीजापुर और 47 दंतेवाड़ा जिले के हैं। यहां इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग, प्लंबिंग, सिलाई और ड्राइविंग जैसे विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। अब तक 7 युवाओं को ड्राइविंग के क्षेत्र में रोजगार मिल चुका है, जबकि 75 युवाओं को सिलाई मशीन वितरित की जा चुकी है।
अपने दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री ने सीआरपीएफ के जवानों से भी मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और समर्पण के कारण ही आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास का वातावरण बन पाया है।
उन्होंने मारडूम घाटी, चित्रकूट, लोहंडीगुड़ा और बारसूर जैसे क्षेत्रों से होकर दंतेवाड़ा पहुंचकर यह संदेश भी दिया कि जो क्षेत्र कभी अत्यंत संवेदनशील माने जाते थे, वे अब सुरक्षित और सुगम हो चुके हैं। आज लोग इन क्षेत्रों में निर्भय होकर आवागमन कर रहे हैं और बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं।
यह दौरा न केवल पुनर्वासित युवाओं के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि क्षेत्र में विकास और सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।