पुलिस के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को नेहरू नगर–नरैय्या तालाब क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अब्दुल जाफर और सुनील जगत को गांजा की फुटकर बिक्री करते हुए गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद कालीबाड़ी क्षेत्र में स्थित एक किराए के मकान में छापेमारी की गई, जहां से हाईटेक तरीके से संचालित गांजा हाइडआउट का खुलासा हुआ।
इस दौरान पुलिस ने 7 किलो 397 ग्राम गांजा (कीमत करीब 85 हजार रुपये), पैकिंग सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक तराजू, सीसीटीवी कैमरे, वाई-फाई राउटर और मोशन सेंसर जैसे उपकरण बरामद किए थे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर संगठित तरीके से नशे का कारोबार चला रहे थे।
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क का संचालन मुकेश गुप्ता उर्फ मुकेश बनिया कर रहा था, जिसे 20 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है और वह फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है। इसके बाद पुलिस फरार आरोपी मनीष वर्मा उर्फ बिरजू की तलाश में जुटी हुई थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में लगातार पतासाजी कर 26 मार्च 2026 को मनीष वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, वह हाइडआउट को संचालित करने, मकान किराए पर लेने और पूरे नेटवर्क के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
पूछताछ में आरोपी से सप्लाई चैन, अन्य सहयोगियों और नेटवर्क संचालन से जुड़ी अहम जानकारी मिली है, जिसके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। अब तक इस मामले में कुल पांच आरोपियों—अब्दुल जाफर, सुनील जगत, मुकेश गुप्ता उर्फ मुकेश बनिया, संजय उर्फ संजू गुप्ता और मनीष वर्मा उर्फ बिरजू—को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(B) और 29 के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
रायपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत ऐसे संगठित अपराधों पर लगातार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समाज को नशा मुक्त बनाने के प्रयासों को और मजबूती मिल सके।