ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए रखीं शर्तें, हमले की स्थिति में जवाब की चेतावनी

ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तें मध्यस्थों के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाने की बात कही है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई के अनुसार प्रमुख मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, फ्रीज किए गए ईरानी फंड जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। साथ ही ईरान ने संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी दी है।

Sep 20, 2026 - 19:49
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ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए रखीं शर्तें, हमले की स्थिति में जवाब की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच बातचीत की संभावित राह फिर खुलती दिखाई दे रही है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तें मध्यस्थ देशों के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाई हैं। उनके अनुसार कतर मध्यस्थता के जरिए ईरान की मांगें अमेरिका तक पहुंचा चुका है और अब तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

रेजाई के मुताबिक ईरान की प्रमुख शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य कार्रवाई का अंत, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने बातचीत शुरू करने के लिए कुल सात शर्तें रखी हैं, हालांकि इन सभी शर्तों को सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं बताया गया है। कतर के साथ-साथ पाकिस्तान भी मध्यस्थता के प्रयासों में शामिल है।

ईरान की ओर से बातचीत की संभावना जताए जाने के साथ ही सैन्य टकराव को लेकर सख्त बयान भी सामने आए हैं। रेजाई ने कहा कि अगर अमेरिका दोबारा हमला करता है तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ईरानी सैन्य कमान ने भी रविवार को अमेरिका और उसके समर्थक क्षेत्रीय देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी। इन बयानों को ईरान की ओर से कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

रेजाई ने दावा किया कि ईरान ने संभावित अमेरिकी कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य तैयारियों और रणनीति में बदलाव किए हैं। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक संसाधनों को लेकर भी कई दावे किए, हालांकि इन सैन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले पर भी क्षेत्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

इस बीच ईरान ने क्षेत्र के दूसरे विवादों में भी मध्यस्थता की इच्छा जताई है। रेजाई ने सऊदी अरब और यमन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त कराने में मदद की पेशकश की है। इसके अलावा ईरान ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की इच्छा भी व्यक्त की है। हालांकि इन प्रयासों की वास्तविक प्रगति और संबंधित पक्षों की सहमति को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्क पहले भी जारी रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की मेजबानी में हुए पिछले समझौते के बाद लड़ाई रोकने और व्यापक समझौते की दिशा में प्रयास किए गए थे, लेकिन वह व्यवस्था बाद में समाप्त हो गई। अब कतर और पाकिस्तान के माध्यम से बातचीत की कोशिश दोबारा आगे बढ़ाने की पहल सामने आई है।

फिलहाल स्थिति में एक ओर ईरान बातचीत के लिए शर्तें रख रहा है, तो दूसरी ओर संभावित सैन्य कार्रवाई की स्थिति में कड़े जवाब की चेतावनी भी दे रहा है। ऐसे में आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी प्रतिक्रिया और मध्यस्थ देशों की कूटनीतिक कोशिशों पर निर्भर करेगी।