स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ती बिजली खपत, कबीरधाम के सर्वे में जुलाई में खपत घटी

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा कबीरधाम जिले के कवर्धा और पंडरिया संभाग में किए गए तुलनात्मक अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि स्मार्ट मीटर बिजली खपत नहीं बढ़ाते। मई, जून और जुलाई 2026 के विश्लेषण में अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत जुलाई में कम दर्ज की गई। विभाग ने उपभोक्ताओं से अफवाहों पर ध्यान न देकर मोर बिजली ऐप और टोल फ्री सेवा का उपयोग करने की अपील की है।

Jul 29, 2026 - 15:21
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स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ती बिजली खपत, कबीरधाम के सर्वे में जुलाई में खपत घटी

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही विभिन्न भ्रांतियों और अफवाहों के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने कबीरधाम जिले के कवर्धा एवं पंडरिया संभाग में स्थापित घरेलू स्मार्ट मीटरों की बिजली खपत का विस्तृत तुलनात्मक अध्ययन कराया है। मई, जून और जुलाई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाते, बल्कि वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल तैयार होता है। अध्ययन में जुलाई माह के दौरान अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

कवर्धा शहर क्षेत्र के 10,143 घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 26 जून 2026 तक कुल बिजली खपत लगभग 28.24 लाख यूनिट दर्ज की गई थी। वहीं 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के बीच यही खपत घटकर लगभग 23.62 लाख यूनिट रह गई। इस प्रकार जुलाई माह में लगभग 27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसी तरह 400 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले 1,950 उपभोक्ताओं के विश्लेषण में भी लगभग 34.23 प्रतिशत तक खपत कम पाई गई।

विभाग का कहना है कि यह स्पष्ट संकेत है कि बिजली बिल का आधार स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं द्वारा वास्तविक रूप से उपयोग की गई बिजली है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन उपभोक्ताओं के यहां अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगाए गए हैं, उनकी बिजली खपत में भी अप्रैल, मई और जून 2026 के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई थी।

उदाहरण के तौर पर जी श्याम नगर के एक उपभोक्ता की अप्रैल 2025 में 170 यूनिट बिजली खपत थी, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 405 यूनिट हो गई। इसी प्रकार मई में 181 यूनिट से बढ़कर 574 यूनिट तथा जून में 210 यूनिट से बढ़कर 561 यूनिट खपत दर्ज हुई। शिक्षक नगर के अन्य उपभोक्ताओं के आंकड़ों में भी इसी प्रकार की वृद्धि देखी गई। इससे स्पष्ट होता है कि बिजली खपत में वृद्धि का कारण स्मार्ट मीटर नहीं बल्कि विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग है।

विभाग ने 400 यूनिट से अधिक खपत करने वाले 135 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का अलग से अध्ययन भी किया। इसमें मई 2026 में कुल खपत 94,500 यूनिट, जून में 74,250 यूनिट तथा जुलाई में घटकर 33,750 यूनिट दर्ज की गई। यानी जुलाई माह में लगभग 45 प्रतिशत तक बिजली खपत कम हुई।

अध्ययन के आधार पर विभाग ने यह भी बताया कि जिन उपभोक्ताओं की बिजली खपत 400 यूनिट से अधिक रहती है, वे मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ नहीं ले पाते, जिससे उनके बिजली बिल अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देते हैं। हालांकि जुलाई माह में खपत कम होने के कारण अगस्त में जारी होने वाले बिजली बिलों में कई उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है और अधिक लोगों को ऊर्जा राहत योजना का लाभ भी मिल सकेगा।

विभाग ने एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग करने पर लगातार तीन माह तक उच्चतम मांग दर्ज होने की स्थिति में लगने वाली सप्लाई अफोर्डिंग राशि अब वर्ष में केवल एक बार दिसंबर माह के बिल के साथ जोड़ी जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को हर माह अतिरिक्त भार नहीं उठाना पड़ेगा।

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए मोर बिजली ऐप के माध्यम से स्मार्ट मीटर की दैनिक और प्रत्येक आधे घंटे की बिजली खपत देखी जा सकती है। सामान्य मीटर वाले उपभोक्ता भी ऐप पर मासिक खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विभाग ने यह भी बताया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए 175 स्थानों पर चेक मीटर लगाए गए, जिनमें दर्ज बिजली खपत और स्मार्ट मीटर की रीडिंग पूरी तरह समान पाई गई।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर विश्वास न करें। किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि वह पारदर्शिता के साथ तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराता रहेगा, ताकि स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के मन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।