दुर्ग में अवैध अफीम खेती मामले में पूर्व बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से जमानत, FIR रद्द करने की याचिका खारिज
दुर्ग के बहुचर्चित अवैध अफीम खेती मामले में पूर्व बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें जमानत मंजूर करते हुए कहा कि वह मौके पर खेत में मौजूद नहीं थे और उनके कब्जे से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ। हालांकि मामले की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l बहुचर्चित अवैध अफीम खेती मामले में पूर्व बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने हाई प्रोफाइल मामले में सुनवाई करते हुए विनायक ताम्रकार की जमानत मंजूर कर दी है। अदालत के समक्ष बचाव पक्ष की ओर से यह दलील रखी गई कि आरोपी मौके पर खेत में मौजूद नहीं था और उसके कब्जे से किसी तरह का नशीला पदार्थ बरामद नहीं किया गया। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने विनायक ताम्रकार को जमानत देने का आदेश दिया।
यह मामला दुर्ग जिले के ग्राम झेंझरी में अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने से जुड़ा हुआ है। 6 मार्च को पुलिस ने गांव में अफीम की कथित अवैध खेती के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। कार्रवाई में पुलिस के साथ राजस्व, आबकारी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी FSL से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। संयुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की थी।
अवैध अफीम खेती से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया था। जांच के दौरान पुलिस और संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी मामले में पूर्व बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार का नाम भी सामने आया था, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और मामला अदालत तक पहुंचा।
हाईकोर्ट में जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से कई महत्वपूर्ण बिंदु अदालत के सामने रखे गए। बचाव पक्ष ने कहा कि विनायक ताम्रकार कथित अफीम की खेती वाले खेत में मौजूद नहीं थे। साथ ही उनके व्यक्तिगत कब्जे से किसी नशीले पदार्थ की बरामदगी नहीं होने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई। इन दलीलों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत की राहत दी।
हालांकि इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति अभी बनी हुई है। अफीम खेती मामले में दर्ज FIR को रद्द करने के लिए दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसका मतलब है कि मामले में दर्ज अपराध की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत मिलने से आरोपी को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन FIR रद्द नहीं होने के कारण प्रकरण समाप्त नहीं हुआ है।
इस पूरे मामले में पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है। 6 मार्च की संयुक्त कार्रवाई के बाद सामने आए तथ्यों और जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है। हाईकोर्ट के जमानत आदेश से विनायक ताम्रकार को राहत मिली है, जबकि FIR रद्द करने की याचिका खारिज होने से अवैध अफीम खेती से जुड़ा मूल मामला अब भी अदालत और जांच एजेंसियों के सामने बना हुआ है।