बलरामपुर के महावीरगंज में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, सरपंच-सचिव पर धांधली के आरोप
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत महावीरगंज में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर पात्र हितग्राहियों के नाम सूची से हटाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के लिए स्वीकृत 765 आवासों में से 295 पात्र ग्रामीणों को अपात्र कर दिया गया। मामले की निष्पक्ष जांच और जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ देने की मांग की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत महावीरगंज में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच और सचिव पर मिलीभगत कर पात्र हितग्राहियों को योजना के लाभ से वंचित करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही है, लेकिन पंचायत स्तर पर पात्रता सूची तैयार करने और आवास आवंटन की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत महावीरगंज के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल 765 आवास स्वीकृत होकर आए थे। आरोप है कि आवासों की सूची तैयार करने के दौरान पंचायत के सरपंच और सचिव ने कथित तौर पर अनियमितता बरती और करीब 295 ऐसे ग्रामीणों को सूची से बाहर कर दिया गया, जिन्हें ग्रामीण पात्र और जरूरतमंद बता रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास पक्का मकान नहीं है और वे लंबे समय से सरकारी आवास योजना का लाभ मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। नाम सूची से हटने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है और उन्होंने अपने हक की मांग को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन पात्र परिवारों के नाम कथित तौर पर गलत तरीके से सूची से हटाए गए हैं, उनके मामले की दोबारा जांच की जाए और पात्रता के आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल किया जाए। साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि यदि सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं जो वास्तव में पात्र नहीं हैं, तो उनकी भी जांच कर अपात्र नामों को हटाया जाना चाहिए, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सके।
बताया गया है कि आवास आवंटन को लेकर ग्रामीणों की शिकायत जिला सीईओ तक पहुंची थी। शिकायत के बाद मामले की पड़ताल के लिए जांच टीम गठित की गई। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया भी उनकी अपेक्षा के अनुरूप निष्पक्ष नहीं रही। उनका कहना है कि जांच अधिकारी गांव पहुंचे, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों की शिकायतों और उनके पक्ष को पर्याप्त रूप से सुनने के बजाय पंचायत स्तर पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर औपचारिक जांच पूरी कर दी गई। ग्रामीणों ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जिन परिवारों के पास पक्का मकान नहीं है, उनके लिए यह योजना सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की उम्मीद है। ऐसे में यदि पात्र लोगों का नाम सूची से बाहर किया गया है तो इससे योजना के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की पारदर्शी तरीके से जांच कराई जाए और पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार दिलाया जाए।
आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों ने जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने की बात भी कही है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और आवास आवंटन से जुड़ी सूची की दोबारा जांच कर पात्र परिवारों को उनका हक दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।