तीजन बाई के निधन पर सीएम योगी ने जताया शोक, कहा- पंडवानी को दी वैश्विक पहचान

पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे भारतीय लोक कला और सांस्कृतिक जगत की अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा पंडवानी को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को संबल देने की प्रार्थना की।

Jul 5, 2026 - 12:43
 0  2
तीजन बाई के निधन पर सीएम योगी ने जताया शोक, कहा- पंडवानी को दी वैश्विक पहचान

UNITED NEWS OF ASIA. पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन भारतीय लोक कला, संस्कृति और संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और वर्षों की संगीत साधना के बल पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा पंडवानी को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तीजन बाई भारतीय लोक संस्कृति की ऐसी प्रतिनिधि कलाकार थीं, जिन्होंने अपनी प्रस्तुति शैली से करोड़ों लोगों को भारतीय परंपराओं और महाभारत की कथाओं से जोड़ा। उन्होंने कहा कि लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी कला साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में मां दंतेश्वरी से प्रार्थना करते हुए दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोक संतप्त परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने भारतीय लोक परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी गायन की शिक्षा प्राप्त की। उस समय पंडवानी की कापालिक शैली को मुख्य रूप से पुरुष कलाकार प्रस्तुत करते थे, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती देते हुए अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से इस शैली में नई पहचान बनाई। उनकी कला ने देश-विदेश के दर्शकों को भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।

भारतीय लोक संस्कृति और पंडवानी गायन के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, वर्ष 2003 में पद्म भूषण और वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।

तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। हालांकि उनकी कला, उनकी आवाज और पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का उनका योगदान सदैव जीवंत रहेगा। भारतीय सांस्कृतिक जगत में उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता रहेगा।