परासिया नगर पालिका में पेयजल टैंकर ठेके की जानकारी पर सवाल, RTI आवेदन निरस्त होने से पारदर्शिता को लेकर उठे गंभीर प्रश्न

छिंदवाड़ा जिले की परासिया नगर पालिका में पेयजल टैंकर व्यवस्था से जुड़े ठेके, भुगतान और सरकारी खर्च की जानकारी मांगने वाले RTI आवेदन को नगर पालिका के लोक सूचना अधिकारी द्वारा कथित तौर पर ‘प्रश्नवाचक और अस्पष्ट’ बताते हुए निरस्त किए जाने का मामला सामने आया है। आवेदक का कहना है कि उसने केवल संबंधित अभिलेख और आधिकारिक दस्तावेज मांगे थे। आवेदन निरस्त होने के बाद प्रथम एवं द्वितीय अपील की तैयारी की जा रही है। मामले ने पेयजल टैंकर व्यवस्था, ठेका प्रक्रिया और सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

Aug 12, 2026 - 14:03
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परासिया नगर पालिका में पेयजल टैंकर ठेके की जानकारी पर सवाल, RTI आवेदन निरस्त होने से पारदर्शिता को लेकर उठे गंभीर प्रश्न

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाड़ा l सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम देता है। लेकिन परासिया नगर पालिका में पेयजल टैंकर व्यवस्था से संबंधित जानकारी मांगने वाले एक RTI आवेदन को कथित तौर पर निरस्त किए जाने के बाद पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामला गर्मी और पेयजल संकट के दौरान नगर पालिका द्वारा संचालित पानी के टैंकरों के ठेके, उनके संचालन तथा भुगतान से जुड़ी वित्तीय प्रक्रिया से संबंधित है। एक जागरूक नागरिक ने नगर पालिका से पेयजल टैंकर व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज, ठेका संबंधी अभिलेख, भुगतान और सरकारी खर्च से संबंधित जानकारी मांगी थी।

आवेदन को ‘अस्पष्ट और प्रश्नवाचक’ बताकर किया निरस्त

आवेदक के अनुसार, उसके द्वारा आवेदन में किसी प्रश्नवाचक वाक्य के माध्यम से जवाब नहीं मांगा गया था, बल्कि संबंधित अभिलेख और आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद नगर पालिका के लोक सूचना अधिकारी ने आवेदन को कथित तौर पर यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि मांगी गई जानकारी ‘प्रश्नवाचक और अस्पष्ट’ है।

इस निर्णय के बाद आवेदक ने सूचना के अधिकार की प्रक्रिया के तहत अपील का रास्ता अपनाने की तैयारी की है। अब मामला प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है।

पेयजल व्यवस्था से जुड़े खर्च पर उठे सवाल

पेयजल आपूर्ति आम नागरिकों से जुड़ी मूलभूत सुविधा है। ऐसे में टैंकरों की संख्या, उनके संचालन, रूट चार्ट, लॉगबुक, ठेका दस्तावेज और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता को लेकर उठे सवाल महत्वपूर्ण हैं।

मामले में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि टैंकर व्यवस्था और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप रही है, तो संबंधित अभिलेखों को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता क्यों बनी? वहीं, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि वास्तविकता में कितने टैंकर संचालित हुए, किन क्षेत्रों में पानी पहुंचाया गया और इसके लिए सरकारी खजाने से कितना भुगतान किया गया।

हालांकि, इन सवालों के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और सक्षम जांच की आवश्यकता होगी।

अपील के रास्ते पर आवेदक

RTI आवेदन निरस्त होने के बाद आवेदक अब नियमानुसार प्रथम अपील और आगे आवश्यकता पड़ने पर द्वितीय अपील की प्रक्रिया अपनाने की तैयारी में है। आवेदक का तर्क है कि सार्वजनिक धन और जनसुविधा से जुड़े मामलों में संबंधित रिकॉर्ड तक नागरिकों की पहुंच पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है।

मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अपीलीय प्राधिकारी नगर पालिका के निर्णय को सही मानते हैं या मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में कोई निर्देश जारी करते हैं।

जांच और पारदर्शिता की मांग

परासिया नगर पालिका के पेयजल टैंकर ठेके को लेकर उठे सवालों के बीच उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की जा रही है। यदि दस्तावेजों की जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि ठेका, टैंकर संचालन और भुगतान की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है, तो संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक होने से उठ रहे संदेह भी दूर हो सकते हैं।

फिलहाल मामला RTI प्रक्रिया और संभावित अपील के चरण में है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों, अपीलीय निर्णय और यदि आवश्यक हो तो सक्षम जांच के बाद ही सामने आएगा।