परीक्षा शुल्क वृद्धि के खिलाफ अभाविप का विरोध, विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगाया छात्र हितों की अनदेखी का आरोप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) रायपुर महानगर ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा शुल्क में 46% वृद्धि और अंकसूची सत्यापन शुल्क ₹5000 किए जाने का विरोध किया है। संगठन ने इसे छात्र विरोधी निर्णय बताते हुए वापस लेने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर l अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), रायपुर महानगर ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा शुल्क, अंकसूची सत्यापन शुल्क तथा अन्य शैक्षणिक शुल्कों में की गई वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे छात्र हितों के खिलाफ और शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण को बढ़ावा देने वाला निर्णय बताया है
अभाविप के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सेमेस्टर परीक्षा शुल्क ₹1075 एवं वार्षिक परीक्षा शुल्क ₹1085 को बढ़ाकर ₹1580 कर दिया गया है, जो लगभग 46 प्रतिशत की एकमुश्त वृद्धि है। परिषद का कहना है कि यह वृद्धि गरीब, मध्यमवर्गीय एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी और उच्च शिक्षा को आम विद्यार्थियों की पहुंच से दूर करेगी
इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा आगामी वर्षों में प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत शुल्क वृद्धि का प्रावधान भी लागू किया गया है, जिसे अभाविप ने पूरी तरह अनुचित बताया है। संगठन का मानना है कि यह निर्णय शिक्षा को सुलभ बनाने के सरकारी उद्देश्यों के विपरीत है और इससे छात्रों में असंतोष बढ़ेगा
अभाविप ने अंकसूची एवं पाठ्यक्रम सत्यापन शुल्क को बढ़ाकर ₹5000 किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के अनुसार नौकरी, उच्च शिक्षा या अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए सत्यापन कराने वाले विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के लिए यह राशि अत्यधिक है। परिषद ने यह भी कहा कि कई मामलों में अंकसूची में त्रुटियां विश्वविद्यालय स्तर की लिपिकीय गलतियों के कारण होती हैं, जिसका आर्थिक भार छात्रों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
इसी तरह उपाधि प्रमाण पत्र में नाम या अन्य विवरण सुधार के लिए ₹500 शुल्क निर्धारित किए जाने को भी अनुचित बताया गया है। अभाविप का कहना है कि इस प्रकार के छोटे सुधारों के लिए भी भारी शुल्क लेना छात्र हितों के खिलाफ है।
अभाविप रायपुर महानगर मंत्री सुजल गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह निर्णय छात्रों पर सीधा आर्थिक प्रहार है। उन्होंने कहा कि एक ओर देश में उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के शुल्क वृद्धि निर्णय छात्रों के लिए कठिनाई पैदा कर रहे हैं।
संगठन ने मांग की है कि परीक्षा शुल्क में की गई 46 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत शुल्क वृद्धि के निर्णय को निरस्त किया जाए, अंकसूची एवं पाठ्यक्रम सत्यापन शुल्क को युक्तिसंगत बनाया जाए तथा नामांकन एवं पंजीयन सुधार शुल्क को समाप्त किया जाए।
अभाविप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि छात्र हितों की अनदेखी करते हुए ये निर्णय वापस नहीं लिए गए तो संगठन छात्रों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर ज्ञापन में प्रदेश सह मंत्री प्रथम फूटाने, महानगर सह मंत्री आशीष, मन, शीतल, संजय, संकल्प, निखिल, भागीरथी एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।