पश्चिम बंगाल में बदल सकते हैं लेनिन, मार्क्स और हो ची मिन्ह के नाम वाली सड़कें, सरकार ने बनाई समिति

पश्चिम बंगाल सरकार ने सड़कों, पुलों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार के लिए एक समिति गठित की है। समिति के सामने कोलकाता की लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी के नाम बदलने के प्रस्ताव भी रखे गए हैं। कार्तिक महाराज समिति की अध्यक्षता करेंगे और समिति अपनी सिफारिश सरकार को सौंपेगी।

Sep 14, 2026 - 17:46
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पश्चिम बंगाल में बदल सकते हैं लेनिन, मार्क्स और हो ची मिन्ह के नाम वाली सड़कें, सरकार ने बनाई समिति

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल में सड़कों, पुलों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ने के आसार हैं। राज्य सरकार ने नाम बदलने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार करने के लिए एक समिति गठित की है। इस समिति के सामने कोलकाता की लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी के नाम बदलने के प्रस्ताव भी रखे गए हैं। समिति प्रस्तावों पर चर्चा करने के बाद अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद नाम परिवर्तन को लेकर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है।

न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज उर्फ कार्तिक महाराज इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। कोलकाता नगर निगम के एक अधिकारी के मुताबिक, समिति की पहली बैठक दुर्गा पूजा के बाद होने की संभावना है। बैठक में अलग-अलग स्थानों के नाम बदलने से संबंधित प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। प्रक्रिया के तहत समिति की सिफारिशों को आगे सरकार के समक्ष रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव विधानसभा तक भी भेजे जा सकते हैं।

समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, मुख्यमंत्री के सलाहकार सुब्रत गुप्ता और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। कार्तिक महाराज ने बताया कि लेनिन सरणी, कार्ल मार्क्स सरणी और हो ची मिन्ह सरणी के नाम बदलने के प्रस्ताव समिति के सामने हैं। उनके अनुसार, इनके अलावा भी राज्य में कई अन्य सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने के सुझाव समिति के समक्ष आ सकते हैं।

नाम परिवर्तन को लेकर तथागत रॉय की ओर से कुछ वैकल्पिक नामों के सुझाव भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने लेनिन सरणी का नाम गणितज्ञ और भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष देबप्रसाद घोष के नाम पर रखने का सुझाव दिया है। वहीं खिदिरपुर स्थित कार्ल मार्क्स सरणी के लिए बंगाली कवि माइकल मधुसूदन दत्त या रंगालाल बंद्योपाध्याय के नाम का प्रस्ताव बताया गया है। हो ची मिन्ह सरणी के लिए अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नाम का सुझाव दिया गया है।

तथागत रॉय ने जवाहरलाल नेहरू रोड और सिद्धो-कान्हू डहर के चौराहे पर स्थित लेनिन की मूर्ति हटाने की मांग भी की है। इसके साथ ही उन्होंने कोलकाता की किसी प्रमुख सड़क का नाम सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर रखने का सुझाव दिया है। इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय समिति की चर्चा और सरकार की आगे की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

लेनिन सरणी का इतिहास भी नाम परिवर्तन की बहस से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस सड़क का पुराना नाम धर्मतला स्ट्रीट था। वर्ष 1970 में लेनिन की जन्म शताब्दी के दौरान इसका नाम बदलकर लेनिन सरणी किया गया था। इसके एक वर्ष बाद सर्कुलर गार्डन रीच रोड का नाम बदलकर कार्ल मार्क्स सरणी किया गया।

इसके अलावा कुछ मुस्लिम हस्तियों के नाम वाली जगहों के नाम बदलने के सुझाव भी सामने आए हैं। तथागत रॉय ने बारासात के ‘टीटुमीर’ बस अड्डे का नाम बदलने की स्थिति में काजी अब्दुल वदूद, बेगम रुकैया और एस. वाजेद अली जैसे नामों पर विचार करने का सुझाव दिया है। फिलहाल ये सभी प्रस्ताव समिति के विचाराधीन हैं और अंतिम फैसला सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।