ग्रामीणों के अनुसार मंगहूर से चिखली धान खरीदी केंद्र की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। इतनी दूरी तक धान ले जाने में किसानों को परिवहन की समस्या के साथ अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है। किसानों के लिए खेत से उपज को खरीदी केंद्र तक पहुंचाना पहले ही एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, ऐसे में दूर स्थित केंद्र तक धान ले जाने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंगहूर में ही उपार्जन केंद्र की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वर्तमान में चिखली खरीदी केंद्र पर आसपास के कई गांवों के किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। किसानों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार खरीदी केंद्र में कतार लगने की स्थिति बनती है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ किसानों को धान बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे किसानों का समय प्रभावित होने के साथ उन्हें अतिरिक्त परिवहन और अन्य खर्च भी उठाना पड़ सकता है।
मंगहूर सहित आसपास के गांवों की कृषि व्यवस्था को देखते हुए ग्रामीणों ने स्थानीय धान उपार्जन केंद्र की आवश्यकता बताई है। ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार मंगहूर, खेड़ेगांव, बड़ेपराली और गुरवंडी में कुल 281 राजस्व पट्टे तथा 153 वनाधिकार पट्टे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ग्रामीणों का कहना है कि चारों गांवों के किसानों को धान बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर खरीदी केंद्र की सुविधा मिलने से बड़ी राहत मिल सकती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से किसानों की संख्या, गांवों की दूरी और स्थानीय आवश्यकता का परीक्षण कर ग्राम मंगहूर में नवीन धान उपार्जन केंद्र स्वीकृत करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि मंगहूर में खरीदी केंद्र शुरू होता है तो आसपास के किसानों को दूर स्थित चिखली केंद्र तक धान ले जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे परिवहन संबंधी कठिनाइयों के साथ समय और अतिरिक्त खर्च की समस्या भी कम हो सकती है।
किसानों के लिए धान खरीदी का समय महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में खरीदी केंद्र तक आसान पहुंच और पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध होना उनकी सुविधा से जुड़ा विषय है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन उनके आवेदन पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित विभाग के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करे और मंगहूर में नया धान उपार्जन केंद्र खोलने की दिशा में कदम उठाए।
फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी है और स्थानीय स्तर पर समाधान की उम्मीद जताई है। अब प्रशासन द्वारा किसानों की संख्या, खरीदी केंद्र से दूरी और अन्य निर्धारित मापदंडों का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।