कांग्रेस के अनुसार वर्ष 2025 में 265 पदों के लिए नियम के मुताबिक पदों की संख्या के तीन गुना यानी 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि केवल 608 अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और 187 अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंक नहीं आने का हवाला देकर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए संबंधित नियमों और अभ्यर्थियों के मूल्यांकन की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
मोहम्मद हुसैन बाबा ने वर्ष 2024 की मुख्य परीक्षा की कुछ कापियों का हवाला देते हुए मूल्यांकन में असमानता के आरोप लगाए। कांग्रेस का दावा है कि सामने आई दो कापियों में एक ही सही उत्तर के लिए एक अभ्यर्थी को शून्य अंक और दूसरे को दो अंक दिए गए। इसी तरह कुछ मामलों में सही और गलत उत्तरों पर समान अंक दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। भक्तिन माता राजिम और होमरूल लीग से जुड़े प्रश्नों के मूल्यांकन को लेकर भी कांग्रेस ने कथित तौर पर मनमाने तरीके से अंक दिए जाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने मूल्यांकनकर्ताओं की योग्यता और गोपनीयता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। मोहम्मद हुसैन बाबा ने आरोप लगाया कि कुछ कापियों का मूल्यांकन ऐसे स्कूली शिक्षकों से कराया गया, जो इस प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं थे। इसके साथ ही मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और नंबर सार्वजनिक होने का भी दावा किया गया है। कांग्रेस ने कहा कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
कांग्रेस ने CGPSC से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें वर्तमान इंटरव्यू प्रक्रिया को स्थगित करना, इंटरव्यू से पहले सभी अभ्यर्थियों की कापियां सार्वजनिक करना, शेष अभ्यर्थियों को भी बिना शुल्क कापी उपलब्ध कराना, परीक्षा के मॉडल उत्तर जारी करना तथा सभी कापियों का पुनर्मूल्यांकन कर नियम के अनुसार 1:3 अनुपात का पालन सुनिश्चित करना शामिल है। कांग्रेस का कहना है कि इन कदमों से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अभ्यर्थियों के बीच किसी भी प्रकार की आशंका को दूर किया जा सकेगा।
मामले में कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित विभाग और CGPSC की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सुकमा से उठे इन सवालों ने राज्य की लोक सेवा परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। अभ्यर्थियों से जुड़े इस संवेदनशील विषय में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।