मोहला में अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई तेज, तहसीलदार ने पटवारियों से मांगी रिपोर्ट

मोहला जिले के चिलमटोला गांव में कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लाटिंग के मामले में प्रशासन सक्रिय हो गया है। समाचार प्रकाशित होने के बाद तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने सभी पटवारियों से तहसील क्षेत्र में हुई अवैध प्लाटिंग की जानकारी मांगी है। वहीं ग्रामीणों ने अवैध प्लाटिंग, संदिग्ध रजिस्ट्री और नामांतरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है।

Aug 1, 2026 - 11:24
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मोहला में अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई तेज, तहसीलदार ने पटवारियों से मांगी रिपोर्ट

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद खान, मानपुर l मोहला जिला मुख्यालय से लगे चिलमटोला गांव में कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लाटिंग के मामले ने तूल पकड़ लिया है। स्थानीय स्तर पर समाचार प्रकाशित होने के बाद राजस्व विभाग हरकत में आ गया है। मोहला तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसील क्षेत्र के सभी पटवारियों से अपने-अपने हल्कों में हुई अवैध प्लाटिंग की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगाने के लिए भी पत्र जारी किया गया है।

बताया जा रहा है कि चिलमटोला में सात एकड़ से अधिक कृषि भूमि को बिना आवश्यक अनुमति, बिना डायवर्सन तथा बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति के छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर कथित रूप से आवासीय प्लाट के रूप में बेचा गया है। आरोप है कि इस जमीन पर 40 से अधिक प्लाट काटकर कॉलोनी विकसित करने का प्रयास किया गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में भू माफियाओं ने करोड़ों रुपये का लाभ कमाया, जबकि प्रशासनिक नियमों की अनदेखी की गई। खबर सामने आने के बाद राजस्व विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अब पटवारियों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

मामले में यह आरोप भी लगाए गए हैं कि जिले में लंबे समय से कृषि भूमि, शासकीय पट्टे की भूमि और सीलिंग भूमि की खरीद-फरोख्त में अनियमितताएं होती रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों के परिजनों के नाम पर भी कथित रूप से अवैध प्लाटों की रजिस्ट्री और नामांतरण किए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी संदिग्ध रजिस्ट्रियों और नामांतरण की समीक्षा की जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित कॉलोनाइजरों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध कॉलोनियों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित प्लाटिंग के दौरान बांध के डुबान क्षेत्र और श्मशान घाट से लगी भूमि को भी प्रभावित किया गया। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों से मिट्टी और मुरूम निकालकर प्लाटिंग वाले क्षेत्र को समतल किया गया। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि बांध के डुबान क्षेत्र में आती है और पूर्व में इसके लिए मुआवजा भी दिया जा चुका है। इन दावों की भी जांच की मांग की गई है।

तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने कहा कि मोहला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि की प्लाटिंग की जानकारी जुटाई जा रही है। सभी संबंधित पटवारियों से रिपोर्ट मांगी गई है तथा रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगाने के लिए आवश्यक पत्राचार किया गया है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।