2011 की सूची में नाम, फिर भी नहीं मिला आवास, दिहाड़ी मजदूर मनोज कुमार साहू ने कलेक्टर से लगाई गुहार

महासमुंद जिले के ग्राम कोसरंगी के दिहाड़ी मजदूर मनोज कुमार साहू ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने पर कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वर्ष 2011 की सर्वे सूची में नाम होने के बावजूद सरपंचों की कथित लापरवाही के कारण आज तक उन्हें आवास नहीं मिला। जर्जर मकान में रहने को मजबूर परिवार ने जल्द योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

Aug 1, 2026 - 11:20
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2011 की सूची में नाम, फिर भी नहीं मिला आवास, दिहाड़ी मजदूर मनोज कुमार साहू ने कलेक्टर से लगाई गुहार

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन महासमुंद जिले के ग्राम कोसरंगी निवासी मनोज कुमार साहू का मामला योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले मनोज कुमार साहू ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2011 की सर्वे सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद आज तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।

मनोज कुमार साहू ने 30 जून 2026 को कलेक्टर महासमुंद को लिखित आवेदन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया। आवेदन में उन्होंने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। सीमित आय के कारण परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा है।

आवेदन में मनोज कुमार साहू ने उल्लेख किया है कि उनका नाम वर्ष 2011 की प्रधानमंत्री आवास योजना की सर्वे सूची में शामिल था। इसके बावजूद पूर्व और वर्तमान सरपंच की कथित लापरवाही के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका। उनका यह भी आरोप है कि हाल ही में हुए सर्वे के दौरान भी उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया, जिससे वह आज भी सरकारी आवास योजना से वंचित हैं।

मनोज कुमार साहू ने बताया कि उनका परिवार एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। मकान की हालत इतनी खराब है कि बरसात के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह स्वयं नया मकान बनाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना ही उनके परिवार के लिए सुरक्षित आवास की एकमात्र उम्मीद बनी हुई है।

आवेदन में उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि उनकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की सर्वे सूची में उनका नाम जोड़ा जाए तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देकर जल्द से जल्द योजना का लाभ दिलाया जाए।

इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आवेदक के दावे सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस आवेदन पर क्या कार्रवाई करता है और वर्षों से आवास योजना के लाभ की प्रतीक्षा कर रहे मनोज कुमार साहू को कब तक राहत मिलती है। ग्रामीणों का मानना है कि पात्र परिवारों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, ताकि उन्हें वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।