छोटेडोंगर में महिलाओं ने घरों में मनाया तीजा पर्व, पति की लंबी उम्र के लिए रखा निर्जला व्रत
नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र में महिलाओं ने तीजा पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। सुहागिन महिलाओं ने घरों में पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। जवारा बोने से लेकर पूजा और विसर्जन तक पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। महिलाओं ने तीजा के पारंपरिक गीत गाकर पर्व की सांस्कृतिक परंपरा को भी जीवंत रखा।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र में तीजा पर्व इस वर्ष श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। क्षेत्र की सुहागिन महिलाओं ने अपने-अपने घरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की और पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। पर्व को लेकर सुबह से ही घरों में धार्मिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने स्नान कर पारंपरिक रूप से तैयार होकर तीजा की पूजा की और दिनभर व्रत रखा।
तीजा पर्व की तैयारियों के तहत महिलाओं ने पहले टोकरी में जवारा बोया। इसके बाद पर्व के दिन जवारा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूजा के दौरान नारियल, फूल, अक्षत, सिंदूर सहित अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री का उपयोग किया गया। महिलाओं ने विधि-विधान के साथ जवारा की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना की। घरों में पूजा के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों ने भी महिलाओं का सहयोग किया और पर्व की परंपराओं में सहभागिता निभाई।
छोटेडोंगर क्षेत्र में तीजा पर्व के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीत भी गाए। कई स्थानों पर महिलाएं समूह के रूप में नदी किनारे पहुंचीं और विधिवत जवारा का विसर्जन किया। जवारा विसर्जन को तीजा पर्व का महत्वपूर्ण अंतिम चरण माना जाता है। विसर्जन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा की और पर्व की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जवारा को नदी में विसर्जित किया।
तीजा पर्व को लेकर स्थानीय स्तर पर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला। कई महिलाओं ने बताया कि इस पर्व में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भी महत्व है। तीजा के अवसर पर महिलाएं एक-दूसरे से मिलती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और पर्व की खुशियां साझा करती हैं। इससे आपसी मेलजोल और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा मिलता है।
मान्यता के अनुसार तीजा पर्व का संबंध माता पार्वती की भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए की गई कठोर साधना से जोड़ा जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। कई महिलाएं इस दौरान निर्जला व्रत का पालन करती हैं और पूरे दिन पूजा-पाठ एवं धार्मिक गतिविधियों में शामिल रहती हैं।
स्थानीय महिलाओं के अनुसार तीजा केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे से जुड़ा पर्व भी है। घरों में पूजा करने से परिवार के सभी सदस्यों को इस परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलता है। छोटेडोंगर क्षेत्र में इस वर्ष भी जवारा बोने, पूजा-अर्चना, पारंपरिक गीतों और विसर्जन के साथ तीजा पर्व की परंपरा निभाई गई। महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखकर परिवार की खुशहाली की कामना की और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व का समापन किया।