UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच तेज हो गई है। एडिशनल कलेक्टर और मुख्यमंत्री कार्यालय के तत्कालीन OSD रहे चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी ने कथित प्रश्नपत्र लीक, उम्मीदवारों से अवैध रकम की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी सामने रखी है। ED के अनुसार बोरघरिया को सात दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।
ED के मुताबिक, इस मामले की जांच की शुरुआत रायपुर EOW में दर्ज FIR के आधार पर हुई थी। इसी प्रकरण में CBI की ओर से भी जांच की गई और तत्कालीन PSC अध्यक्ष सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है। एजेंसी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC परीक्षा-2021 में शामिल कुछ उम्मीदवारों से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई। आरोप है कि यह रकम प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर ली गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। ED का दावा है कि उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस ले जाया गया था, जहां प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई। इसके बाद मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों के आधार पर कथित तौर पर तैयारी कराने के लिए उम्मीदवारों को महासमुंद जिले के बारनवापारा अभयारण्य के आसपास स्थित एक सैंक्चुअरी रिजॉर्ट ले जाने का भी आरोप है।
ED के अनुसार, जांच के दौरान चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में संबंधित अवधि में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 66 लाख 64 हजार रुपये जमा होने की जानकारी मिली है। एजेंसी ने एक सितंबर को बोरघरिया से जुड़े परिसरों पर तलाशी की थी। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए जाने की बात कही गई है। ED का दावा है कि इन उपकरणों से बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी के अनुसार बातचीत में रकम की वापसी और भुगतान की मांग से संबंधित बातें सामने आई हैं।
जांच में मेसर्स फ़िगरकेव ई-कॉम (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन को भी शामिल किया गया है। ED का आरोप है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को जमा करने और अलग-अलग लेन-देन के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए किया गया। एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड और जांच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर बोरघरिया की कथित भूमिका की जांच किए जाने की बात कही है।
फिलहाल चेतन बोरघरिया ED की सात दिन की कस्टोडियल रिमांड में हैं। एजेंसी उनसे मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य पहलुओं पर पूछताछ कर रही है। ED ने जांच जारी होने की बात कही है। ऐसे में मामले में सामने आए आरोपों और दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने तथा अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। CGPSC प्रकरण में ED की ताजा कार्रवाई ने कथित परीक्षा अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन की जांच को नया मोड़ दिया है।