बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल: कागजों में विकास, जमीनी हकीकत में हालात खराब

बलरामपुर जिले की 476 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ढाई साल बाद भी सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, जिससे सरकार के विकास दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

Mar 24, 2026 - 12:08
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बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल: कागजों में विकास, जमीनी हकीकत में हालात खराब

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर ।  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से विकास कार्यों को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां पंचायत स्तर पर हालात बेहद खराब नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार जहां ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ के तहत विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।

जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं। पंचायत चुनाव हुए करीब ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन गांवों में अब तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए वादे आज भी अधूरे हैं और विकास केवल कागजों तक सीमित रह गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी भी नहीं पहुंच पाई हैं। कई गांवों में लोग खराब सड़कों और गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही रात के समय स्ट्रीट लाइट के अभाव में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

हैरानी की बात यह है कि इस स्थिति से केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधि भी परेशान हैं। कई सरपंचों और सचिवों ने बताया कि उनके पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों की स्वीकृति में भी लंबा समय लग रहा है, जिससे योजनाएं शुरू ही नहीं हो पा रही हैं।

एक सरपंच ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि “ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को अपेक्षित गति नहीं मिल पाई है। जनता लगातार सवाल पूछ रही है, लेकिन हमारे पास जवाब देने के लिए संसाधन ही नहीं हैं।”

विकास कार्यों की इस धीमी रफ्तार से ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए भी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में प्राथमिक सुविधाएं भी पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाई हैं।

यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें प्रदेश को तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ाने की बात कही जाती है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में पंचायतों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देंगे और पंचायतों में विकास कार्यों को गति देंगे, या फिर ग्रामीणों को आने वाले समय में भी इसी तरह समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।