मनेन्द्रगढ़ में सरकारी गाड़ी से सब्जी ढोने का मामला गरमाया, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

मनेन्द्रगढ़ में एक डीएसपी स्तर की अधिकारी द्वारा सरकारी वाहन से सब्जी ढोने का मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिले में अपराध बढ़ रहे हैं, तब सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग गंभीर चिंता का विषय है।

Mar 6, 2026 - 12:36
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मनेन्द्रगढ़ में सरकारी गाड़ी से सब्जी ढोने का मामला गरमाया, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया | त्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में पुलिस प्रशासन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक डीएसपी स्तर की अधिकारी द्वारा सरकारी वाहन का उपयोग निजी कार्य के लिए किया गया, जिसमें बाजार से सब्जियां ढोने की बात सामने आई है। इस घटना के बाद जिले में कानून-व्यवस्था और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ जिले में चोरी, असामाजिक गतिविधियों और अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस के कुछ अधिकारी अपने दायित्वों से इतर निजी कार्यों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में जब सरकारी वाहन और सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग की तस्वीरें सामने आती हैं, तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

लोगों का कहना है कि शहर में रात के समय गश्त बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। कई इलाकों में चोरी और गुंडागर्दी की घटनाओं को लेकर भी नागरिकों ने चिंता जताई है। पुलिस अक्सर इन मामलों में स्टाफ की कमी और संसाधनों की सीमित उपलब्धता का हवाला देती है। लेकिन जब सरकारी वाहन का उपयोग निजी सामान लाने-ले जाने में होता दिखाई देता है, तो जनता के मन में असंतोष बढ़ना लाजमी है।

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तीन बड़े सवाल उठ रहे हैं। पहला सवाल यह है कि पुलिस अधिकारियों की प्राथमिकता आखिर क्या है? जिस समय एक वरिष्ठ अधिकारी बाजार में निजी सामान की खरीदारी में व्यस्त दिखाई देते हैं, उसी समय कोई पीड़ित न्याय के लिए थाने के चक्कर काट रहा हो सकता है।

दूसरा सवाल सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़ा है। आम नागरिकों के वाहन दस्तावेजों में थोड़ी सी भी कमी होने पर पुलिस सख्ती से चालान करती है, लेकिन जब सरकारी वाहन का उपयोग निजी कार्यों के लिए होता है तो क्या वही नियम अधिकारियों पर लागू नहीं होने चाहिए?

तीसरा सवाल कानून-व्यवस्था की छवि को लेकर है। जब वर्दीधारी अधिकारी इस तरह की गतिविधियों में दिखाई देते हैं, तो अपराधियों के मन में पुलिस का भय कम होता है और व्यवस्था की छवि भी प्रभावित होती है।

फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

जनता का कहना है कि वे टैक्स इसलिए नहीं भरते कि सरकारी संसाधनों का उपयोग निजी कार्यों में किया जाए। लोगों की मांग है कि पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता के साथ काम करे।