भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता खुला? अमेरिकी हाउस से रूस प्रतिबंध बिल पास, अब ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 262-159 वोट से मंजूरी दी है। बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत और चीन सहित कई देशों पर इसका संभावित असर बताया गया है। हालांकि, भारत पर 100% टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है; इसके लिए आगे राष्ट्रपति की कार्रवाई और कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल जरूरी होगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 16 सितंबर 2026 को 262-159 वोट से मंजूरी दे दी। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन समेत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर संभावित असर को लेकर यह विधेयक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। बिल के हाउस से पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है और आगे की कार्रवाई उनके स्तर पर होगी।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसकी ऊर्जा से होने वाली आय को सीमित करना बताया गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की Ways and Means Committee के अनुसार, कानून राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर शून्य से लेकर 100 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाने का अधिकार देगा, जो रूस से उत्पन्न कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और निर्धारित मानदंडों में आते हैं। इसके अलावा रूस से जुड़े अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उसकी ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित शिपिंग नेटवर्क पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान है।
अमेरिकी संसद में इस कानून के संभावित दायरे में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों का उल्लेख किया गया है। हाउस रूल्स कमेटी में दर्ज एक संशोधन में इन देशों को उन संभावित देशों की सूची में रखा गया है जिन पर परिस्थितियों के आधार पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सूची में शामिल हर देश पर स्वतः 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो जाएगा।
भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। नए अमेरिकी कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। Reuters के अनुसार, हाउस से पारित विधेयक राष्ट्रपति को भारत, चीन और अन्य देशों पर रूस की ऊर्जा खरीद के संदर्भ में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अतिरिक्त शक्ति देता है। इससे भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा संबंधों को लेकर आगे अनिश्चितता बढ़ सकती है।
विधेयक में कुछ परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की जानकारी के अनुसार, शुल्क संबंधी प्रावधान रूस से ऊर्जा आयात और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों के आकलन से जुड़े हैं। इसके अलावा देशों की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है। इसलिए किसी देश पर वास्तविक टैरिफ लागू होने का फैसला केवल बिल पारित होने से तय नहीं होता, बल्कि कानून के तहत आगे की कार्यवाही और संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी हाउस में बिल के पक्ष में 262 और विपक्ष में 159 वोट पड़े। इससे पहले अमेरिकी सीनेट इस कानून को 86-11 के अंतर से पारित कर चुकी थी। अब हाउस से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास पहुंच गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही यह कानून प्रभावी होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
भारत के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 100 प्रतिशत टैरिफ की संभावना को तत्काल लागू शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वर्तमान स्थिति में अमेरिकी हाउस ने ऐसा कानून पारित किया है जो राष्ट्रपति को भविष्य में निर्धारित देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की शक्ति दे सकता है। इसलिए भारत पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल किस तरह करता है और संबंधित प्रावधानों को किस रूप में लागू किया जाता है।