पातररास में श्रद्धा और भक्ति के साथ रामायण का भव्य पूजन, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा क्षेत्र
दंतेवाड़ा जिले के पातररास में धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ रामायण का भव्य पूजन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
UNITED NEWS OF ASIA.कमलेश, दंतेवाड़ा | जिले के पातररास क्षेत्र में धार्मिक आस्था, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ रामायण का भव्य पूजन एवं पाठ आयोजित किया गया। इस पावन आयोजन में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा-अर्चना की गई।
रामायण पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया। पूजा के पश्चात रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ सहभागिता निभाई। रामचरितमानस के चौपाइयों के पाठ से गांव का हर कोना भक्तिरस में डूब गया। भजन-कीर्तन और “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा, जिससे कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
आयोजन में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की समान रूप से सहभागिता देखने को मिली। ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का कार्य करते हैं। रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला मार्गदर्शक है, जिससे सत्य, मर्यादा, सेवा और त्याग जैसे मूल्यों की सीख मिलती है।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य धार्मिक संस्कारों को सुदृढ़ करना और समाज में सद्भावना, शांति एवं नैतिक मूल्यों का संदेश फैलाना रहा। आयोजकों ने कहा कि वर्तमान समय में जब सामाजिक तनाव और भटकाव बढ़ रहा है, ऐसे में रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। ग्रामीणों ने इस आयोजन को सफल और प्रेरणादायक बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की इच्छा जताई। पातररास में आयोजित यह रामायण पूजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।