मुख्यमंत्री वृक्षारोपण योजना पर सवाल: 9 लाख खर्च, फिर भी सूख गए पौधे

मोहला-मानपुर-चौकी जिले के अंबागढ़ चौकी विकासखंड स्थित ग्राम पिपरखार में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत लगभग 9 लाख रुपये की लागत से लगाए गए पौधे देखरेख के अभाव में सूख गए हैं। तीन साल बाद योजना की जमीनी हकीकत सामने आने पर पर्यावरण संरक्षण और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

Jun 6, 2026 - 13:16
 0  1
मुख्यमंत्री वृक्षारोपण योजना पर सवाल: 9 लाख खर्च, फिर भी सूख गए पौधे

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना ग्राम पिपरखार में सवालों के घेरे में आ गई है। अंबागढ़ चौकी विकासखंड के इस गांव में वर्ष 2022 में लगभग 9 लाख रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया था। योजना के तहत पौधों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी, सिंचाई व्यवस्था और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन तीन वर्ष बाद स्थिति यह है कि अधिकांश पौधे सूख चुके हैं और जिस क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित होना था, वहां अब वीरानी नजर आ रही है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरें और हालात सरकारी दावों की वास्तविकता को उजागर कर रहे हैं। पौधों की देखभाल और संरक्षण के अभाव में वृक्षारोपण स्थल पूरी तरह उपेक्षित दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर पौधों के अवशेष ही बचे हैं, जबकि सिंचाई के लिए बनाई गई व्यवस्था भी निष्क्रिय पड़ी हुई है।

जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत थी। योजना के क्रियान्वयन के दौरान पौधारोपण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब पौधों के रोपण और संरक्षण के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, तब उनकी नियमित निगरानी और देखरेख क्यों नहीं की गई।

मामले में ग्राम पंचायत से जुड़े जिम्मेदार लोग भी स्वीकार कर रहे हैं कि वृक्षारोपण अभियान अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। वहीं, जब वन विभाग के अधिकारियों से इस परियोजना की वर्तमान स्थिति और पौधों के सूखने के कारणों को लेकर सवाल पूछा गया तो स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। अधिकारियों ने जवाबदेही तय करने के बजाय विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं की जानकारी देना अधिक उचित समझा

विश्व पर्यावरण दिवस के ठीक अगले दिन सामने आई यह तस्वीर पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हर वर्ष बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि पौधों की देखभाल और संरक्षण नहीं हो पाता तो ऐसे अभियानों का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

अब स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों की मांग है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि योजना के तहत खर्च की गई राशि का उपयोग किस प्रकार हुआ। साथ ही यह भी तय किया जाए कि पौधों के संरक्षण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।

ग्राम पिपरखार का यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन तमाम वृक्षारोपण योजनाओं की सफलता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है, जिनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देना है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जवाबदेही किसकी तय होती है।