कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण पर हुआ मंथन

कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा में आयोजित वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरकों के उपयोग, जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कृषि विज्ञान केंद्रों की वार्षिक कार्ययोजना और नई कृषि तकनीकों पर भी मंथन हुआ।

Jul 21, 2026 - 17:22
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कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण पर हुआ मंथन

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) कवर्धा में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों के उपयोग, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, जैव उर्वरकों के प्रभावी इस्तेमाल, जल संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर, भाटापारा, मुंगेली और कवर्धा के वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए। साथ ही वर्ष 2027-28 की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करते हुए किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति तैयार की गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रमुख वैज्ञानिक जी.पी. आयाम उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीकों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने संसाधनों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में संत कबीर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कवर्धा के अधिष्ठाता राजीव श्रीवास्तव, स्वर्गीय पुनाराम निषाद मात्स्यिकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता मनोरमा, विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी तथा प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख बी.पी. त्रिपाठी ने वर्ष 2025-26 में जिले में किए गए प्रक्षेत्र परीक्षणों, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों तथा प्राकृतिक खेती और समन्वित कृषि प्रणाली से जुड़े कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जी फसलों में नई तकनीकों के सफल प्रदर्शन किए गए हैं, जिनसे किसानों को बेहतर उत्पादन और आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।

बैठक में वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए जैव उर्वरकों, हरी खाद और अन्य वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही संभावित एल-नीनो प्रभाव को ध्यान में रखते हुए धान की कतार बोनी तकनीक अपनाने और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

प्रगतिशील किसान अदिति कश्यप ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सुझाव दिए। वहीं नेतराम चंद्रवंशी ने धान में झूठा कंडवा रोग के प्रभावी प्रबंधन पर अनुसंधान बढ़ाने की आवश्यकता बताई। रूपेंद्र जायसवाल ने जल संरक्षण और लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा देने का सुझाव रखा।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक रंजीत राजपूत ने किसानों को समूह आधारित खेती अपनाने और बेहतर मार्केट लिंकेज विकसित करने के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से किसानों को बेहतर बाजार और अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है।

बैठक में कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों, वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्यों, प्रगतिशील किसानों तथा कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा, बिलासपुर, भाटापारा और मुंगेली के वैज्ञानिकों सहित लगभग 75 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बैठक में कृषि नवाचार, जल संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए।