आयोग की निगरानी और SJPU की तत्परता से सकुशल लौटी लापता बच्ची

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की निगरानी और एसजेपीयू (पुलिस) की त्वरित कार्रवाई से बिलासपुर की 12 वर्षीय लापता बच्ची सुरक्षित बरामद हुई। आयोग ने मामले की लगातार मॉनिटरिंग की और अब पुनर्वास व काउंसलिंग पर भी फोकस रहेगा।

Jul 21, 2026 - 17:25
Jul 21, 2026 - 17:28
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आयोग की निगरानी और SJPU की तत्परता से सकुशल लौटी लापता बच्ची

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सतत निगरानी और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की सक्रिय कार्रवाई से बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र से लापता 12 वर्षीय बालिका को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया। इस मामले में बिलासपुर पुलिस ने आयोग को विस्तृत प्रतिवेदन भी उपलब्ध कराया है।

जानकारी के अनुसार, 3 जुलाई को बालिका की मां ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा से दूरभाष पर संपर्क कर बताया कि उनकी 12 वर्षीय पुत्री 27 जून से लापता है। उन्होंने आशंका जताई कि बच्ची किसी असुरक्षित स्थिति में हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने तत्काल विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मिता कौर से चर्चा कर जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए।

इसके बाद 5 जुलाई को आयोग की अध्यक्ष स्वयं बिलासपुर पहुंचीं और सिरगिट्टी थाना में बालिका के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि बच्ची की तलाश में हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी के साथ समीक्षा बैठक कर जांच की प्रगति और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

आयोग की लगातार मॉनिटरिंग के बाद पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया और तकनीकी तथा मैदानी स्तर पर जांच तेज कर दी। लगातार चार दिनों तक की गई निगरानी और अभियान के बाद 9 जुलाई को पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर क्षेत्र से बालिका को सकुशल बरामद कर लिया।

महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में बालिका का बयान दर्ज किया गया। पूछताछ के दौरान बालिका ने बताया कि उसके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि आयोग इस पूरे मामले की लगातार निगरानी करता रहा है और आगे भी बालिका के पुनर्वास, मनोसामाजिक परामर्श (काउंसलिंग), शिक्षा की निरंतरता तथा बाल संरक्षण से जुड़े अन्य आवश्यक पहलुओं पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेगा, ताकि बच्ची सामान्य और सुरक्षित जीवन में वापस लौट सके।

आयोग ने इस मामले में बिलासपुर पुलिस और विशेष किशोर पुलिस इकाई की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई कि यदि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, बिना बताए घर से निकलना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें। कई बार ऐसे संकेत ADHD या अन्य मानसिक एवं व्यवहारगत समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को डांटने के बजाय उनसे संवाद स्थापित करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।