CJP प्रदर्शन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, लाठीचार्ज याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

CJP के संसद मार्च के दौरान कथित लाठीचार्ज और पुलिस बल प्रयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने हिंसा के संबंध में कई एफआईआर दर्ज कर वीडियो फुटेज के आधार पर जांच तेज कर दी है।

Jul 21, 2026 - 18:10
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CJP प्रदर्शन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, लाठीचार्ज याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने सोमवार को हुई घटना के बाद मामले की अर्जेंट सुनवाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे उसी दिन सूचीबद्ध करने से मना कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि "कोर्ट को इस सब में मत घसीटो।" इसके साथ ही पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को आयोजित CJP के "संसद चलो" मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। याचिकाकर्ता ने पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराने तथा प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पत्थरबाजी, लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं। पुलिस के अनुसार, हिंसा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।

दिल्ली पुलिस ने मामले में विभिन्न थानों में कई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट और अन्य संबंधित थाना क्षेत्रों में मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान लगभग 250 से अधिक वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) तथा आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं। इन मामलों में सरकारी आदेश की अवहेलना, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं। यदि जांच में प्रतिबंधित हथियार या अन्य आपत्तिजनक सामग्री के उपयोग के प्रमाण मिलते हैं तो आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की त्रिस्तरीय जांच शुरू कर दी है। इस जांच में हिंसा के कारणों, सुरक्षा व्यवस्था, प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच, बुधवार को निर्धारित सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट याचिका में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत पर विस्तृत विचार करेगा। अदालत के समक्ष पुलिस कार्रवाई की वैधता और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी बहस होने की संभावना है।

फिलहाल, मामले की न्यायिक सुनवाई और पुलिस जांच दोनों प्रक्रियाएं जारी हैं। अदालत का अंतिम निर्णय और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।