बलरामपुर में ‘5G’ का दावा, ज़मीन पर 3G भी नहीं! नेटवर्क समस्या पर भड़के ग्रामीण
बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में 5G सेवाओं के दावों के बीच खराब नेटवर्क और धीमी इंटरनेट स्पीड को लेकर ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ रही है। लोगों ने Reliance Jio समेत टेलीकॉम कंपनियों पर महंगे रिचार्ज के बावजूद खराब सेवा देने का आरोप लगाया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में डिजिटल इंडिया और 5G सेवाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण और सुदूर अंचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने खराब नेटवर्क और धीमी इंटरनेट स्पीड को लेकर गंभीर नाराज़गी जताई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में 5G सेवा का प्रचार तो बड़े स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई जगहों पर 3G जैसी स्पीड भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि Reliance Jio जैसी कंपनियां 5G के नाम पर महंगे रिचार्ज प्लान बेच रही हैं, जिनकी वैधता 28 दिन की होती है, लेकिन नेटवर्क की गुणवत्ता बेहद खराब है।
‘बफरिंग’ बना रोजमर्रा की समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि इंटरनेट चलाने के दौरान लगातार ‘बफरिंग’ की समस्या बनी रहती है, जिससे ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल सेवाओं और दैनिक कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में तो नेटवर्क सिग्नल तक नहीं मिल पाता, जिससे लोग मूलभूत डिजिटल सुविधाओं से भी वंचित हैं।
नेताओं और प्रशासन से जवाब की मांग
क्षेत्र के लोगों ने जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान बेहतर कनेक्टिविटी और विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
डिजिटल इंडिया पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तो सुदूर अंचल के क्षेत्रों में बुनियादी नेटवर्क सुविधा भी क्यों नहीं मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि महंगे रिचार्ज के बावजूद खराब सेवा मिलना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
सुधार की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिले में नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए, टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं की जांच की जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए, ताकि लोग डिजिटल सेवाओं का सही लाभ उठा सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर आवाज उठाने को मजबूर होंगे।