UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l छत्तीसगढ़ के पंडरिया क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें क्षेत्रीय विधायक भावना बोहरा ने कलेक्टर और डीएफओ को कड़ी चेतावनी देते हुए 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
मामला भोरमदेव जंगल सफारी के निमंत्रण से जुड़ा हुआ है, जिसमें विधायक भावना बोहरा, मुख्यमंत्री और जिला अध्यक्ष का नाम हटाए जाने को लेकर नाराजगी जताई गई है। विधायक का आरोप है कि यह प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है और जनप्रतिनिधियों का अपमान है। उन्होंने इसे प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला बताया।
विधायक भावना बोहरा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि इस प्रकार की लापरवाही बार-बार होती है, तो यह शासन व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह बनाना आवश्यक है। “नाम हटाने से जनप्रतिनिधियों का महत्व कम नहीं होगा, बल्कि इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं,” उन्होंने कहा। विधायक ने इस मामले को विशेषाधिकार हनन से भी जोड़ते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया।
विधायक ने पंडरिया क्षेत्र की जनता से भी अपील की है कि वे इस मुद्दे पर जागरूक रहें और अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो पंडरिया की जनता सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराएगी।
इस बयान के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। संबंधित अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे जल्द से जल्द इस मामले में स्पष्टता प्रदान करें और स्थिति को संभालें। सूत्रों के अनुसार प्रशासन इस मामले की आंतरिक समीक्षा में जुट गया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह विवाद तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और आमजन भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाता है और क्या निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है या नहीं। फिलहाल पंडरिया क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्म होता नजर आ रहा है।