महाशिवरात्रि पर शिवकोकड़ी शिव मंदिर में उमड़े लाखों श्रद्धालु, स्वयंभू शिवलिंग बना आस्था का केंद्र
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के शिवकोकड़ी गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय विशाल मेला आयोजित होता है। स्वयंभू शिवलिंग और उसकी बढ़ती ऊंचाई की मान्यता के कारण यह मंदिर प्रदेशभर में आस्था और रहस्य का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
UNITED NEWS OF ASIA .हेमंत पाल धमधा | छत्तीसगढ़ में भगवान शिव के अनेक प्राचीन और आस्था से जुड़े मंदिर मौजूद हैं, लेकिन शिवकोकड़ी शिव मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यता और स्वयंभू शिवलिंग के कारण एक अलग पहचान रखता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां प्रतिवर्ष तीन दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आस्था और रहस्य का संगम
यह मंदिर शिवकोकड़ी गांव में स्थित है और पूरे क्षेत्र में गहरी श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि यह स्वयंभू है। बताया जाता है कि शिवलिंग की ऊंचाई जमीन से लगभग आठ फीट है और समय के साथ इसकी ऊंचाई बढ़ती जा रही है।
सावन माह और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से भक्त पहुंचते हैं।
नदी तट पर बसा आस्था का धाम
यह प्राचीन शिव मंदिर आमनेर नदी के तट पर स्थित है। प्राकृतिक वातावरण और शांत धार्मिक परिवेश के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है।
यहां दर्शन करने के लिए केवल दुर्ग जिले से ही नहीं, बल्कि राजनांदगांव, कवर्धा और राजधानी रायपुर सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर की प्रमुख विशेषताएं
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स्वयंभू शिवलिंग, जिसकी ऊंचाई बढ़ने की मान्यता है
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महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय विशाल मेला
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सावन माह में विशेष पूजा एवं जलाभिषेक
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मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
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मुख्य द्वार के बाईं ओर शीतला माता मंदिर तथा दाईं ओर राधा-कृष्ण मंदिर स्थित
400 से 500 साल पुराना इतिहास
स्थानीय किवदंतियों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास लगभग 400 से 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि जिस स्थान पर वर्तमान मंदिर स्थित है, उसी स्थान से स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था। समय-समय पर श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों के सहयोग से मंदिर का विस्तार भी किया गया है।
श्रद्धालुओं की आस्था
मंदिर के पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि पूरे वर्ष यहां भक्तों का आवागमन बना रहता है, जबकि सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर आस्था के सागर में बदल जाता है।