कबीरधाम में विशेष लोक अदालत, 31 चेक बाउंस मामलों का हुआ निराकरण
कबीरधाम और पंडरिया न्यायालय में आयोजित विशेष लोक अदालत में चेक बाउंस से जुड़े 31 मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। कुल 1 करोड़ 27 हजार 644 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।
UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार कबीरधाम जिले में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (चेक बाउंस) से संबंधित मामलों का त्वरित एवं आपसी सहमति से निराकरण करना था। जिला न्यायालय कबीरधाम और तहसील न्यायालय पंडरिया में आयोजित इस विशेष अभियान के दौरान कुल 31 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।
विशेष लोक अदालत का आयोजन 18 जुलाई 2026 को किया गया, जिसमें जिला न्यायालय से लेकर तहसील न्यायालय स्तर तक लंबित चेक बाउंस मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए रखा गया। इस पहल का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करना तथा पक्षकारों को शीघ्र और सरल न्याय उपलब्ध कराना था।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जिला न्यायालय कबीरधाम में चेक बाउंस मामलों के निराकरण के लिए तीन अलग-अलग खंडपीठों का गठन किया गया। वहीं तहसील न्यायालय पंडरिया में एक खंडपीठ गठित कर मामलों की सुनवाई की गई। सभी खंडपीठों ने पक्षकारों के बीच आपसी समझौते के आधार पर विवादों का समाधान कराने का प्रयास किया।
विशेष लोक अदालत के दौरान जिला न्यायालय कबीरधाम में कुल 30 चेक बाउंस मामलों का निराकरण किया गया। इन मामलों में कुल 96 लाख 77 हजार 644 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। वहीं तहसील न्यायालय पंडरिया में एक मामले का सफलतापूर्वक निपटारा करते हुए 3 लाख 50 हजार रुपये का अवार्ड पारित किया गया। इस प्रकार दोनों न्यायालयों में कुल 31 मामलों का निराकरण हुआ और कुल 1 करोड़ 27 हजार 644 रुपये के अवार्ड जारी किए गए।
लोक अदालत की विशेषता यह रही कि इसमें पक्षकारों ने आपसी सहमति और समझौते के आधार पर विवादों का समाधान किया, जिससे उन्हें लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली। इस व्यवस्था से समय और धन दोनों की बचत हुई तथा न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम हुआ।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि विशेष लोक अदालतों का उद्देश्य केवल मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि लोगों को सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना भी है। चेक बाउंस जैसे आर्थिक मामलों में आपसी समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान होने से दोनों पक्षों को लाभ मिलता है और व्यावसायिक संबंध भी बेहतर बने रहते हैं।
विधिक सेवा प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि जिन मामलों का समाधान आपसी सहमति से संभव है, वे लोक अदालतों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इससे न केवल न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल होती है, बल्कि वर्षों तक चलने वाली कानूनी कार्यवाही से भी बचा जा सकता है।
विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन से यह स्पष्ट हुआ कि वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भविष्य में भी इस प्रकार के विशेष आयोजन जारी रखने की बात कही है, ताकि अधिक से अधिक लंबित मामलों का शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जा सके।