दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने गोविंदाओं का उत्साह बढ़ाते हुए दही हांडी को एकता, सहयोग और टीम भावना का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से कर्तव्य, नेतृत्व और कर्मयोग की प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए रामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना और सुरभि गोधाम योजना की जानकारी दी। कार्यक्रम में लखबीर सिंह लक्खा और बी प्राक की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया।

Sep 6, 2026 - 08:13
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दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है: मुख्यमंत्री साय

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव में भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी इस आयोजन में शामिल हुए और उन्होंने गोविंदाओं की टोलियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दही हांडी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृतियों को जीवंत करने के साथ समाज को एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दही हांडी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सामूहिकता और सहयोग का सुंदर प्रतीक है। हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले अपने प्रयास से ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकता। उसके नीचे खड़े प्रत्येक साथी का विश्वास, सहयोग और सामर्थ्य उसे लक्ष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह जब समाज और प्रदेश के लोग एक लक्ष्य के लिए मिलकर प्रयास करते हैं, तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को कर्तव्य और जिम्मेदारी की प्रेरणा बताते हुए कहा कि कृष्ण ने अपने जीवन में अलग-अलग भूमिकाओं को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया। ग्वालबालों के प्रिय सखा के रूप में उन्होंने प्रेम और मित्रता का संदेश दिया, द्वारका के नेतृत्वकर्ता के रूप में कुशल नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया और कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया। उनका जीवन हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य और दायित्व को निभाने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने वनवास का लंबा समय छत्तीसगढ़ की धरती पर बिताया और अबूझमाड़ क्षेत्र रामायण काल के दंडकारण्य का हिस्सा रहा है। प्रदेश के धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी परंपराओं को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने इनके संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से अब तक छत्तीसगढ़ के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्याधाम जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत राज्य के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है और अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु इसका लाभ ले चुके हैं। उन्होंने सुरभि गोधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों और आस्था केंद्रों का भी उल्लेख हुआ। मुख्यमंत्री ने भोरमदेव, राजिम के कुलेश्वर महादेव, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी जैसे धार्मिक स्थलों को प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया।

विशाल दही हांडी उत्सव में गोविंदाओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा और लोकप्रिय गायक बी प्राक ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा और ईश्वर साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। आयोजन ने भक्ति, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का संदेश देते हुए लोगों को एकता और सहयोग की भावना से जुड़ने का संदेश दिया।