रामानुजनगर में EWS प्रमाण पत्र को लेकर विवाद, कूटरचित दस्तावेजों से जारी कराने का आरोप
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर तहसील कार्यालय में EWS प्रमाण पत्र जारी किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि OBC श्रेणी से संबंधित आवेदक ने स्वयं को सामान्य वर्ग का बताते हुए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर EWS प्रमाण पत्र हासिल किया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज कोरबा में प्रवेश की प्रक्रिया किए जाने की बात सामने आई है। तहसीलदार मनहरन राठिया ने मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रमाण पत्र निरस्त करने और मेडिकल कॉलेज कोरबा को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजने की बात कही है। मामले में जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, सूरजपुर l सूरजपुर जिले के रामानुजनगर तहसील कार्यालय से EWS प्रमाण पत्र जारी किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में तहसीलदार पर नियमों की अनदेखी करते हुए प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप लगाया गया है। विवाद सामने आने के बाद अब प्रशासन की ओर से प्रमाण पत्र को निरस्त करने और संबंधित मामले में आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही जा रही है।
जानकारी के अनुसार रामानुजनगर निवासी अमन जायसवाल पिता अभय जायसवाल कलार जाति से संबंधित हैं, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के अंतर्गत बताया गया है। आवेदक को पूर्व में 12 सितंबर 2022 को रामानुजनगर SDM कार्यालय से पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। ऐसे में उनके द्वारा सामान्य वर्ग के आधार पर EWS प्रमाण पत्र हासिल किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का लाभ निर्धारित नियमों के तहत उन परिवारों को मिलता है जो सामान्य वर्ग से संबंधित हों और निर्धारित आर्थिक एवं अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करते हों। ऐसे में पहले से OBC प्रमाण पत्र रखने वाले व्यक्ति के सामान्य वर्ग के आधार पर EWS प्रमाण पत्र प्राप्त करने को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
आरोप है कि आवेदक ने स्वयं को अनारक्षित यानी सामान्य वर्ग का बताते हुए शपथ पत्र के साथ आवेदन प्रस्तुत किया और इसी आधार पर EWS प्रमाण पत्र जारी किया गया। तहसीलदार रामानुजनगर मनहरन राठिया के अनुसार आवेदन में आवेदक ने स्वयं को सामान्य वर्ग का बताया था और शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात तहसीलदार ने कही है।
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब यह जानकारी सामने आई कि उक्त EWS प्रमाण पत्र का उपयोग मेडिकल कॉलेज कोरबा में प्रवेश की प्रक्रिया के लिए किया जा रहा है। तहसीलदार के अनुसार जब प्रमाण पत्र को लेकर कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल की जानकारी मिली, तब मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। मेडिकल कॉलेज कोरबा को भी इस संबंध में पत्र जारी करने की बात कही गई है, ताकि प्रमाण पत्र के आधार पर चल रही प्रवेश प्रक्रिया में नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि आवेदक के पास पहले से OBC वर्ग का प्रमाण पत्र मौजूद था, तो सामान्य वर्ग के आधार पर EWS प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें किसी तरह की कूटरचना की गई थी।
तहसीलदार मनहरन राठिया ने मामले की जांच कराने और दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है। प्रमाण पत्र निरस्त करने की प्रक्रिया के साथ संबंधित संस्थान को भी आवश्यक जानकारी देने की बात सामने आई है। फिलहाल पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रमाण पत्र जारी कराने और जारी करने की प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। ऐसे में अब प्रशासनिक जांच के परिणाम पर सभी की नजर बनी हुई है।