“शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, पीढ़ियों का निर्माण करता है” : मनीष तिवारी

शिक्षक दिवस के अवसर पर मनीष तिवारी ने शिक्षकों की भूमिका को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और अच्छे अंक दिलाने तक सीमित नहीं मानते हुए उन्हें विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य का निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को अंकों की दौड़ से आगे ले जाकर ज्ञान, आत्मविश्वास, संस्कार और व्यवहारिक क्षमता से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षकों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, सकारात्मक कार्य वातावरण और उचित अवसरों की आवश्यकता पर जोर देते हुए अशासकीय विद्यालयों को भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

Sep 5, 2026 - 19:09
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“शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, पीढ़ियों का निर्माण करता है” : मनीष तिवारी

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l शिक्षक दिवस के अवसर पर मनीष तिवारी ने शिक्षकों की भूमिका और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना या विद्यार्थियों को अच्छे अंक दिलाना नहीं है, बल्कि शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य की नींव तैयार करता है। एक शिक्षक का मार्गदर्शन विद्यार्थी के जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए शिक्षा को केवल परीक्षा और परिणाम तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थी के संपूर्ण विकास पर ध्यान देना जरूरी है।

मनीष तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को अंकों की दौड़ से आगे ले जाने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों में केवल किताबी ज्ञान विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें संस्कार, आत्मविश्वास, व्यवहारिक क्षमता और परिस्थितियों का सामना करने की योग्यता भी विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी ज्ञान के साथ जीवन के मूल्यों को समझता है, तब शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। इस प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि शिक्षक ही विद्यार्थी की क्षमताओं को पहचानकर उसे सही दिशा देने का काम करता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक मजबूत होगा तो शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और जब शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो समाज का भविष्य भी मजबूत होगा। शिक्षकों को केवल सम्मान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सकारात्मक कार्य वातावरण और अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के लिए उचित अवसर भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए। बदलते समय के साथ शिक्षा के तरीके और विद्यार्थियों की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में शिक्षकों को नई तकनीक, नए शिक्षण तरीकों और बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर सीखने का अवसर मिलना आवश्यक है।

मनीष तिवारी ने अशासकीय विद्यालयों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अशासकीय विद्यालय शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण भागीदार हैं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में इनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के साथ-साथ विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसके लिए शासन, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और पालकों के बीच बेहतर समन्वय होना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें। शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर सीखने की जिज्ञासा पैदा करने के साथ ही उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं। विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर संवाद से विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास को और मजबूत किया जा सकता है।

मनीष तिवारी ने कहा कि किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका लंबे समय तक दिखाई देती है। शिक्षक कक्षा में पढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को अनुशासन, जिम्मेदारी, मेहनत, ईमानदारी और सामाजिक मूल्यों का महत्व समझाता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज और देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाते हैं। इस तरह एक शिक्षक का प्रभाव केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके माध्यम से कई पीढ़ियों तक पहुंचता है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी गुरुजनों को नमन करते हुए कहा कि उन शिक्षकों का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा, जिन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ-साथ जीवन जीने की सही दिशा दिखाई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान के साथ उनकी आवश्यकताओं और कार्य परिस्थितियों पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। बेहतर शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कारवान विद्यार्थी ही मजबूत समाज की नींव तैयार कर सकते हैं।