छत्तीसगढ़ में कंप्रेस्ड बायोगैस निर्माण को मिली रफ्तार, 8 नए प्लांट होंगे स्थापित
छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ कंप्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026 के तहत राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 8 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निजी निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें BPCL और GAIL जैसी प्रमुख कंपनियां भागीदारी कर रही हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ कंप्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026 के तहत आठ कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य कृषि अवशेषों, पशुधन से प्राप्त गोबर और शहरी जैविक कचरे का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन तैयार करना तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों और स्थानीय निकायों को भी लाभ पहुंचाना है।
इस संबंध में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार जैविक अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। नई नीति के तहत रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में कुल आठ कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का आवंटन भी किया जा चुका है।
सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। भारत पेट्रोलियम (BPCL) और गेल इंडिया (GAIL) जैसी प्रमुख ऊर्जा कंपनियां इन परियोजनाओं में पूंजी निवेश कर रही हैं। इसके अलावा राज्य में कंप्रेस्ड बायोगैस क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निजी निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश में रोजगार, औद्योगिक विकास और ऊर्जा उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इन बायोगैस प्लांटों में मुख्य रूप से फसलों की कटाई के बाद बचने वाले कृषि अवशेष, पराली, अनुपयोगी जैविक कचरा, पालतू पशुओं का गोबर तथा शहरी निकायों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा। इन सभी जैविक पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग स्वच्छ ईंधन के रूप में परिवहन, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पराली जलाने जैसी समस्याओं में कमी आएगी और पर्यावरण प्रदूषण पर भी नियंत्रण मिलेगा। साथ ही जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन से शहरों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
राज्य सरकार की यह पहल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन बढ़ने से पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का दायरा बढ़ेगा। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार का कहना है कि CG-CBG नीति 2026 के माध्यम से छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के शुरू होने से राज्य में हरित ऊर्जा, निवेश, रोजगार और सतत विकास को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।