अपने दम पर मानव सेवा में जुटे आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रकाश टाटा, सरकार से सहयोग की उम्मीद

जुन्नारदेव, गुढ़ी और अम्बाड़ा क्षेत्र में आयुर्वेद पद्धति के माध्यम से मानव सेवा में जुटे डॉ. प्रकाश टाटा अपने अनुभव और जड़ी-बूटियों के ज्ञान के आधार पर लोगों के उपचार का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार बचपन में गुरु के साथ जंगल में बिताए वर्षों के दौरान उन्हें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का ज्ञान मिला, जिसके बाद उन्होंने चिकित्सा के माध्यम से मानव सेवा का संकल्प लिया। डॉ. टाटा अपने प्रयासों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता भी महसूस करते हैं।

Sep 23, 2026 - 15:21
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अपने दम पर मानव सेवा में जुटे आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रकाश टाटा, सरकार से सहयोग की उम्मीद

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l जुन्नारदेव, गुढ़ी और अम्बाड़l आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रकाश टाटा लंबे समय से आयुर्वेद पद्धति के माध्यम से मानव सेवा के प्रयास में जुटे हुए हैं। चिकित्सा के क्षेत्र को मानव कल्याण का माध्यम मानते हुए वे अपने स्तर पर लोगों के उपचार में योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उनके प्रयासों को सरकारी स्तर पर सहयोग और आवश्यक समर्थन मिले तो मानव सेवा के इस कार्य को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

डॉ. प्रकाश टाटा का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके अनुसार जब वे करीब छह वर्ष के थे, तब वे अपने गुरु के साथ जंगल चले गए और कई वर्षों तक उनके साथ रहे। इसी दौरान उन्होंने आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उपचार पद्धति का ज्ञान प्राप्त किया। जंगल में बिताए वर्षों के दौरान उन्होंने विभिन्न जड़ी-बूटियों के उपयोग और उनके औषधीय महत्व को समझने का प्रयास किया।

डॉ. टाटा बताते हैं कि बचपन में माता-पिता से दूर रहकर गुरु के साथ लंबे समय तक जंगल में रहने के अनुभव ने उनके भीतर मानव सेवा की भावना को मजबूत किया। जड़ी-बूटियों और आयुर्वेदिक उपचार के प्रति रुचि बढ़ने के बाद उन्होंने चिकित्सा के माध्यम से लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया।

उनके अनुसार वर्ष 1962 में वे सुकरी, जुन्नारदेव पहुंचे। इसके बाद गुढ़ी, इकलहरा, चंदामेटा और परासिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में रहते हुए उन्होंने आयुर्वेद पद्धति के माध्यम से लोगों के उपचार का प्रयास किया। बाद में जिला मुख्यालय में रहकर भी वे इसी क्षेत्र में काम करते रहे। उनका उद्देश्य उपचार के माध्यम से लोगों को बेहतर जीवन देने का प्रयास करना रहा है।

डॉ. टाटा के अनुसार वे पिछले कई दशकों से कन्हान क्षेत्र सहित जिले, प्रदेश, देश और विदेश के लोगों का आयुर्वेद पद्धति से उपचार कर रहे हैं। उनके काम को व्यापक पहचान वर्ष 2017-18 के आसपास मिली, जब उनके अनुसार श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर सनत जयसूर्या का उपचार किया गया। इसके बाद आयुर्वेद पद्धति के प्रति लोगों की रुचि बढ़ने का दावा किया गया है।

डॉ. टाटा का कहना है कि उनके पास देश और विदेश से अनेक लोग उपचार के लिए पहुंचे हैं। वे अपने स्तर पर लगातार मानव सेवा का कार्य कर रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों तक आयुर्वेदिक उपचार पद्धति की जानकारी एवं सुविधा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

डॉ. टाटा का मानना है कि मानव सेवा के इस कार्य को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए सरकारी सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। उनका कहना है कि यदि सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग और समर्थन मिलता है तो आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से मानव कल्याण के उनके प्रयासों को और अधिक विस्तार दिया जा सकता है।

उनका कहना है कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उपचार व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से वे अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर लगातार प्रयासरत हैं।