बताया गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला और मानपुर में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक के पद पर पदस्थ भूमानिद्दीन अहिरवार और रामगोपाल चढ़ार ने साझेदारी में उक्त कृषि भूमि खरीदी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ने जमीन दलाल संजय मिश्रा से करीब एक करोड़ रुपये में जमीन खरीदने की बात सामने आई है। इसके बाद इसी कृषि भूमि को कथित तौर पर अलग-अलग हिस्सों में बांटकर ग्राहकों को बेचने का काम शुरू किया गया।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, मोहला-वागिनसुर रोड स्थित संबंधित खसरे की करीब एक एकड़ कृषि भूमि के अब तक पांच हिस्सों में बिक्री और रजिस्ट्री होने की बात कही जा रही है। इनमें सालिक राम नेताम को 5 डिसमिल, मोहम्मद हादी शेख को 10 डिसमिल, यज्ञदत्त को 5 डिसमिल, लेखराम को 5 डिसमिल और मोरध्वज साहू को साढ़े 5 डिसमिल जमीन बेचे जाने का उल्लेख है। इन जमीनों की रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया गया है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कृषि भूमि को छोटे भूखंडों में विभाजित कर बिक्री की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं। साथ ही, शासकीय सेवा में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा जमीन खरीदने और प्लाटिंग गतिविधि में शामिल होने को लेकर विभागीय स्तर पर भी जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
मोहला में जिला मुख्यालय बनने के बाद जमीनों की खरीद-बिक्री और प्लाटिंग गतिविधियों में तेजी आने की बात स्थानीय स्तर पर कही जा रही है। आरोप है कि प्रतिबंधों के बावजूद कृषि भूमि और अन्य जमीनों की रजिस्ट्री कराई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित दस्तावेजों तथा विभागीय जांच के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में तहसीलदार अनुरिमा टोप्पो ने कहा कि संबंधित प्लाटिंग के मामले का तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी विजय खोबरागड़े ने कहा कि दोनों कर्मचारियों के पास एक करोड़ रुपये की राशि कहां से आई, उनके द्वारा खरीदी गई भूमि की जानकारी विभाग को दी गई या नहीं और वे जमीन संबंधी कारोबार में किस प्रकार शामिल हुए, इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी।
मामले में अब प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच पर नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि की खरीद, उसका विभाजन, रजिस्ट्री और नामांतरण निर्धारित नियमों के अनुरूप हुए हैं या नहीं। साथ ही, यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट होगी।