करमा पूजा में शामिल हुईं लक्ष्मी राजवाड़े, प्रकृति और लोकपरंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने गृह ग्राम बीरपुर में आयोजित करमा पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामीणों के साथ विधि-विधान से करम देव की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, प्रकृति और पारंपरिक पर्वों के संरक्षण पर जोर देते हुए नई पीढ़ी को लोकपरंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया।

Sep 23, 2026 - 15:36
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करमा पूजा में शामिल हुईं लक्ष्मी राजवाड़े, प्रकृति और लोकपरंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने गृह ग्राम बीरपुर में आयोजित प्रकृति के पावन पर्व करमा पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामीणजनों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के अनुसार करम देव की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।

करमा पूजा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और ग्रामीण जनजीवन से जुड़ा पारंपरिक पर्व है। यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामुदायिक एकता और लोक आस्था का प्रतीक माना जाता है। करम देव की पूजा के दौरान ग्रामीणजन अच्छी फसल, परिवार की खुशहाली और समाज की समृद्धि की कामना करते हैं। पर्व के अवसर पर पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और रीति-रिवाजों से बीरपुर का माहौल उत्साह और उल्लास से भर गया।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, तीज-त्योहारों और प्रकृति से जुड़े पर्वों से है। करमा जैसे लोकपर्व लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं। इन परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारे और सामूहिकता की भावना निहित है।

उन्होंने कहा कि लोकसंस्कृति और परंपराएं केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखना और नई पीढ़ी को इनके महत्व से परिचित कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं और बच्चों से लोककलाओं, पारंपरिक पर्वों और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया।

करमा पूजा के दौरान ग्रामीणजनों ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए करमा पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र और प्रदेश की निरंतर प्रगति तथा सभी परिवारों के सुख-समृद्धि की कामना की।

करमा पर्व के आयोजन में ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता देखने को मिली। पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने पर्व के महत्व को और जीवंत किया। आयोजन के माध्यम से प्रकृति, संस्कृति और लोकपरंपराओं के प्रति सम्मान की भावना भी सामने आई।