संभागायुक्त राठौर प्रशिक्षण कक्ष में पहुंचे और वहां विभिन्न व्यवसायों से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थियों से सीधे बातचीत की। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से पूछा कि उन्हें किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी है और संस्थान में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं या नहीं। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से उनके अनुभवों और प्रशिक्षण से उन्हें होने वाले व्यावहारिक लाभ के बारे में भी जानकारी ली।
व्यवहारिक प्रशिक्षण पर दिया जोर
निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त ने विभिन्न व्यवसायों से जुड़े प्रशिक्षकों से भी चर्चा की। उन्होंने प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण के स्वरूप, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षणार्थियों को दी जा रही व्यवहारिक जानकारी के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
राठौर ने प्रशिक्षकों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षणार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। प्रशिक्षण ऐसा होना चाहिए, जिससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवा अपने कौशल का उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें।
उन्होंने प्रशिक्षण को रोजगार और स्वरोजगार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप प्रभावी एवं उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया।
पाठ्य-पुस्तक और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश
संभागायुक्त ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण से संबंधित पाठ्य-पुस्तक और आवश्यक अध्ययन सामग्री अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि व्यवहारिक प्रशिक्षण के साथ विषय से संबंधित अध्ययन सामग्री उपलब्ध होने से प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी को बेहतर तरीके से समझने में सहायता मिलेगी।
इसके साथ ही अध्ययन सामग्री प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी प्रशिक्षणार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में काम कर सकती है।
स्वरोजगार से जोड़ने पर फोकस
निरीक्षण के दौरान संस्थान की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संभागायुक्त ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में युवाओं को विभिन्न व्यवसायों और कौशल से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त ने अधिकारियों और प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने तथा प्रशिक्षणार्थियों को ऐसा व्यावहारिक कौशल देने के निर्देश दिए, जिससे वे प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।