संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और हर्ष का विषय है। यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म को मिला पुरस्कार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान भी है।
उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का विशिष्ट उदाहरण है। अपनी आस्था, परंपराओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से रामनामी समाज ने प्रदेश की लोक संस्कृति को समृद्ध किया है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को देश के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है।
राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशील और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिल्म से जुड़े कलाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों, निर्माता और सहयोगियों की भी इस सम्मान में महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत व्यापक और विविधतापूर्ण है। प्रदेश की लोककलाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं इसकी विशिष्ट पहचान हैं। ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन परंपराओं को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश के लोक कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक कर्मियों को अपनी जड़ों और लोक विरासत को रचनात्मक माध्यमों से सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में चुना गया है। फिल्म के निर्माता बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशक भरतबाला गणपति हैं।
राजेश अग्रवाल ने भरतबाला गणपति एवं ‘राम-नामी’ फिल्म की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।