खैरागढ़ में दिनदहाड़े मुरूम का अवैध खनन, सूचना के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से खनिज विभाग पर उठे सवाल
खैरागढ़ जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम पाण्डुका में मुरूम के कथित अवैध खनन को लेकर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जेसीबी और हाइवा के जरिए दिनदहाड़े मुरूम निकाला जा रहा है। सूचना देने के बावजूद टीम के मौके पर नहीं पहुंचने का भी दावा किया गया है। खनिज अधिकारी बबलू पांडे ने मामले में कार्रवाई की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ l खैरागढ़ जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम पाण्डुका में मुरूम के कथित अवैध खनन को लेकर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में रोजाना जेसीबी और हाइवा वाहनों की मदद से दिनदहाड़े मुरूम का उत्खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चल रही इस गतिविधि के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित हो रही है। वहीं यदि बिना वैध अनुमति और रॉयल्टी के खनन किया जा रहा है, तो इससे शासन को राजस्व नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाण्डुका क्षेत्र में मुरूम उत्खनन की जानकारी खनिज विभाग को फोन के माध्यम से तत्काल दी गई थी। इसके बावजूद विभागीय टीम मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंची। लोगों का कहना है कि यदि सूचना मिलने के बाद समय रहते टीम पहुंचती, तो मौके पर मुरूम से लदे कई हाइवा और उत्खनन में इस्तेमाल की जा रही जेसीबी मशीन को जब्त किया जा सकता था। ग्रामीणों के मुताबिक मौके पर करीब 5 से 6 हाइवा वाहनों के मौजूद होने की संभावना थी।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि अवैध खनन को लेकर शिकायतें सामने आने और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद यदि मौके पर कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पाण्डुका क्षेत्र में मुरूम उत्खनन की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों के अनुसार मुरूम से लदे वाहन कथित तौर पर कलेक्टर कार्यालय के सामने से होकर भी गुजरते हैं। ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही नियमित रूप से हो रही है, तो संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था में यह गतिविधि क्यों नहीं आ रही है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस मामले में खनिज अधिकारी बबलू पांडे ने कार्रवाई की बात कही है। हालांकि कार्रवाई की समयसीमा और मौके पर विभाग की ओर से की गई जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विभाग पाण्डुका में कथित अवैध मुरूम खनन की जांच कब शुरू करता है और जांच में यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो क्या कार्रवाई की जाती है।
मुरूम और अन्य गौण खनिजों के उत्खनन के लिए निर्धारित नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन जरूरी है। अवैध उत्खनन की स्थिति में पर्यावरणीय नुकसान के साथ सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में पाण्डुका मामले में प्रशासनिक जांच और मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वहां खनन वैध अनुमति के तहत हो रहा है या नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। फिलहाल स्थानीय लोगों ने तत्काल निरीक्षण, जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।