स्वस्थ छत्तीसगढ़ की नई रूपरेखा तैयार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ पर रहेगा विशेष फोकस

नवा रायपुर में आयोजित ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़ परामर्श’ में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और डिजिटल हेल्थ सिस्टम के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया।

Jun 12, 2026 - 11:49
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स्वस्थ छत्तीसगढ़ की नई रूपरेखा तैयार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ पर रहेगा विशेष फोकस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई रणनीति तैयार करने की पहल शुरू की है। इसी उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़ परामर्श’ का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने राज्य की स्वास्थ्य चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसके लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने, सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर लगातार कार्य किया जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त सह संचालक संजीव कुमार झा सहित कई विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद रहे।

परामर्श के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया गया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित प्रसव और मजबूत रेफरल प्रणाली के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाई जा सकती है। विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों के निकट बर्थ वेटिंग होम स्थापित करने, आपातकालीन परिवहन सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से गर्भवती महिलाओं को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

बाल स्वास्थ्य से जुड़े सत्रों में नवजात शिशुओं की देखभाल, कुपोषण, निमोनिया और डायरिया जैसी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने जन्म के तुरंत बाद स्तनपान को बढ़ावा देने और समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और तकनीक के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया गया। योजनाओं की निगरानी, संसाधनों के बेहतर उपयोग और जरूरत के अनुसार सेवाओं के विस्तार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को प्रभावी माध्यम बताया गया।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने ई-संजीवनी, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ABHA आधारित सेवाओं और ऑनलाइन रेफरल सिस्टम को भविष्य की आवश्यकता बताया। उनका मानना है कि इन तकनीकों के माध्यम से मरीजों को अधिक तेज, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

बैठक में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की उपलब्धियों को भी साझा किया गया। विशेषज्ञों ने माना कि तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच के कारण बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। परामर्श में प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य रोडमैप तैयार किया जाएगा, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने का काम करेगा।