जेल विभाग के अनुसार ग्राम पथर्रा में लगभग 10.20 हेक्टेयर भूमि पर 200 बंदियों की क्षमता वाली आधुनिक खुली जेल विकसित की गई है। यहां बंदियों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। साथ ही जेल एवं सुरक्षा कर्मियों के लिए भी आवासीय क्वार्टर और बैरक का निर्माण किया गया है।
खुली जेल की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहां बंदियों को पारंपरिक जेलों की तरह ऊंची चारदीवारी और कड़ी बंदिशों में नहीं रखा जाएगा। सीमित निगरानी के बीच उन्हें सामान्य जीवन शैली अपनाने का अवसर मिलेगा। बंदी गौशाला, डेयरी, सब्जी उत्पादन, मछली पालन, कुक्कुट पालन, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब निर्माण, फैब्रिकेशन, भवन निर्माण, काष्ठ कला, सिलाई, बुनाई और अन्य कुटीर उद्योगों से जुड़कर रोजगारपरक गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे। हालांकि उन्हें जेल विभाग द्वारा निर्धारित नियमों और अनुशासन का पालन करना अनिवार्य होगा।
प्रारंभिक चरण में केवल ऐसे बंदियों को खुली जेल में स्थान दिया जाएगा, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है और जिन्होंने जेल में कम से कम 11 वर्ष की सजा अच्छे आचरण के साथ पूरी की हो। इसके अलावा उनका अनुशासन, सामाजिक व्यवहार और भविष्य में अपराध की संभावना जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। पात्र बंदियों का अंतिम चयन महानिदेशक जेल की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।
खुली जेल में बंदियों को रोजगारपरक कौशल विकसित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, कंप्यूटर संचालन, बुक बाइंडिंग, प्रिंटिंग, बागवानी और पशुपालन जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए समझौते के तहत रिहाई के बाद पात्र बंदियों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
जिला प्रशासन के सहयोग से बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर 'आस्था कैफे' और ग्रॉसरी शॉप संचालित की जाएगी, जहां बंदी कार्य कर सकेंगे। वहीं खुली जेल परिसर में स्थापित एंपोरियम में बंदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री होगी। इससे उन्हें आय अर्जित करने के साथ समाज से सकारात्मक जुड़ाव का अवसर मिलेगा।
सरकार का मानना है कि यह पहल बंदियों के मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास को नई दिशा देगी। खुली जेल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में पुनर्स्थापित होने और सम्मानजनक जीवन जीने का बेहतर अवसर मिल सकेगा।