शिविर में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच और उपचार किया गया। इस दौरान 89 लोगों की गैर-संचारी रोग यानी एनसीडी स्क्रीनिंग की गई। 12 महिलाओं की विशेष स्वास्थ्य जांच की गई, जबकि मलेरिया जांच में 4 मलेरिया पीएफ पॉजिटिव मामले सामने आए। संबंधित मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा गया।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 114 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की गई और 151 एक्स-रे जांच की गई। जांच के दौरान संदिग्ध मरीजों को आगे की जांच और आवश्यक उपचार के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी की समय पर पहचान और उपचार की प्रक्रिया को मजबूत करना रहा।
शिविर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का स्टॉल भी लगाया गया। यहां ग्रामीणों को जेनेरिक दवाओं के बारे में जानकारी दी गई और आवश्यकता के अनुसार दवाओं का वितरण किया गया। इसके साथ ही पात्र लोगों को आयुष्मान कार्ड से संबंधित सुविधा और जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। शिविर में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच और पंजीयन किया गया। बच्चों के नियमित टीकाकरण के तहत पेंटा और एमआर के टीके लगाए गए। इससे ग्रामीण क्षेत्र में माताओं और बच्चों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकीं।
स्वास्थ्य शिविर के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली मितानिनों को सरपंच की उपस्थिति में श्रीफल और शाल भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बीएमओ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
गंगालूर में आयोजित यह शिविर सेवा संकल्प अभियान के उस उद्देश्य को सामने लाता है, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं को केवल स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय लोगों के करीब पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। जांच, उपचार, दवा वितरण, टीबी स्क्रीनिंग, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और स्वास्थ्य योजनाओं की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से ग्रामीणों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।