मोहला-मानपुर में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, मोरचुल प्राथमिक शाला में 25 बच्चों का भविष्य एक शिक्षक के भरोसे

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड की शासकीय प्राथमिक शाला मोरचुल में शिक्षकों की कमी का मामला सामने आया है। स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 25 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन नियमित शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने के कारण एक ही अस्थाई शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित होने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से तत्काल नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है।

Aug 19, 2026 - 15:55
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मोहला-मानपुर में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, मोरचुल प्राथमिक शाला में 25 बच्चों का भविष्य एक शिक्षक के भरोसे

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। मानपुर विकासखंड के संकुल बागडोंगरी अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मोरचुल में नियमित शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 25 बच्चे अध्ययनरत हैं और इन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी फिलहाल एक ही अस्थाई शिक्षक के भरोसे होने की बात सामने आई है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार विद्यालय में एक भी नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं है। एक अस्थाई या ट्विटर शिक्षक के माध्यम से स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था संचालित की जा रही है। पहली से पांचवीं तक की अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों को संभालने की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर होने से शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दूरस्थ क्षेत्र में स्थित इस प्राथमिक शाला की स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों की बुनियादी शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए और विद्यालय में पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षकों की पदस्थापना जरूरी है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की है।

एक शिक्षक के भरोसे पांच कक्षाओं का संचालन करना विद्यालय प्रबंधन के लिए भी चुनौतीपूर्ण स्थिति है। पहली से पांचवीं तक के बच्चों की अलग-अलग शैक्षणिक जरूरतें होती हैं। ऐसे में एक ही शिक्षक द्वारा सभी कक्षाओं को संभालने से प्रत्येक बच्चे को पर्याप्त समय और मार्गदर्शन मिल पाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर स्कूल में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की मांग तेज हुई है।

मोरचुल प्राथमिक शाला की स्थिति ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी बेहतर और नियमित शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके शैक्षणिक विकास पर पड़ सकता है।

अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच कर जल्द से जल्द नियमित शिक्षकों की पदस्थापना की जाए। उनका कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से कक्षाओं का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि मोरचुल प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले 25 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।