4×4 सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा कठिन रास्तों पर मिलता है। इस तकनीक में इंजन की शक्ति चारों पहियों तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे कम ट्रैक्शन वाली परिस्थितियों में वाहन को बेहतर पकड़ मिलती है। कीचड़, रेत, बर्फ, ऊबड़-खाबड़ रास्ते, ढलान और कठिन ऑफ-रोड परिस्थितियों में 4×4 सिस्टम वाहन को आगे बढ़ने में मदद करता है। हालांकि, अलग-अलग वाहनों में 4×4 सिस्टम का काम करने का तरीका और ड्राइविंग मोड अलग हो सकते हैं।
अगर कार का इस्तेमाल मुख्य रूप से शहर की पक्की सड़कों, हाईवे और रोजाना ऑफिस आने-जाने के लिए किया जाना है, तो 4×4 सिस्टम की जरूरत सीमित हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में 4×2 यानी फ्रंट-व्हील ड्राइव या रियर-व्हील ड्राइव वाहन भी रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए पर्याप्त होते हैं। ऐसे खरीदारों के लिए 4×4 के बजाय आराम, सुरक्षा फीचर्स, माइलेज और सर्विस कॉस्ट जैसे पहलुओं पर ध्यान देना अधिक उपयोगी हो सकता है।
कीमत और रनिंग कॉस्ट भी खरीदारी के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आम तौर पर 4×4 वेरिएंट में अतिरिक्त ड्राइवट्रेन और मैकेनिकल सिस्टम होने के कारण इसकी कीमत 4×2 वेरिएंट से अधिक हो सकती है। अतिरिक्त वजन और ड्राइवट्रेन के कारण ईंधन दक्षता भी मॉडल और ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुसार प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, लंबे समय में सर्विस और मेंटेनेंस का खर्च भी वाहन के सिस्टम और उपयोग पर निर्भर करता है।
दूसरी ओर, जो लोग नियमित रूप से ऑफ-रोडिंग करते हैं, पहाड़ी या ग्रामीण इलाकों में कठिन रास्तों पर वाहन चलाते हैं या एडवेंचर ट्रिप और कैंपिंग के दौरान कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए 4×4 सिस्टम उपयोगी हो सकता है। ऐसे रास्तों पर अतिरिक्त ट्रैक्शन और ड्राइविंग कंट्रोल वाहन की क्षमता को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करते हैं।
नई कार खरीदने से पहले अपनी वास्तविक जरूरत का आकलन करना जरूरी है। रोजाना कितनी दूरी तय करनी है, ज्यादातर सड़कें कैसी हैं, साल में कितनी बार ऑफ-रोड ड्राइविंग करनी है और बजट कितना है, इन सभी बातों को ध्यान में रखना चाहिए। केवल 4×4 बैज देखकर फैसला करने के बजाय वाहन के उपयोग और कुल स्वामित्व लागत को समझकर 4×2 या 4×4 विकल्प चुनना अधिक व्यावहारिक तरीका हो सकता है।