परलकोट में भारी वाहनों को लेकर बढ़ा विरोध, संयुक्त मोर्चा के बाद भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना भी उतरी मैदान में

परलकोट क्षेत्र में सूरजागढ़ माइंस से संचालित भारी वाहनों के विरोध ने राजनीतिक और जनआंदोलन का रूप ले लिया है। संयुक्त मोर्चा के चक्का जाम के बाद भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना ने भी प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर ने पखांजूर दौरे के दौरान क्षतिग्रस्त सड़क और पुलिया का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया, जिससे लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

Aug 6, 2026 - 11:28
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परलकोट में भारी वाहनों को लेकर बढ़ा विरोध, संयुक्त मोर्चा के बाद भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना भी उतरी मैदान में

UNITED NEWS OF ASIA. रोहित देहारी, पखांजूर l परलकोट क्षेत्र में महाराष्ट्र के सूरजागढ़ माइंस से संचालित भारी वाहनों के आवागमन को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पहले संयुक्त मोर्चा द्वारा चक्का जाम कर आंदोलन किया गया और अब भाजपा, कांग्रेस तथा शिवसेना ने भी अलग-अलग स्तर पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग उठाई है। क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर बढ़ते जनदबाव के बीच प्रशासन पर शीघ्र निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है।

परलकोट संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मरोड़ा में एक दिवसीय चक्का जाम आयोजित किया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि सूरजागढ़ माइंस से निकलने वाले भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण पहले से जर्जर सड़कें और पुल-पुलिया तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। उनका कहना है कि यही सड़कें परलकोट क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की मुख्य संपर्क कड़ी हैं और इनके खराब होने से ग्रामीणों, मरीजों, विद्यार्थियों, किसानों तथा व्यापारियों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि परलकोट क्षेत्र की सड़कों पर भारी वाहनों का संचालन तत्काल बंद किया जाए। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र बनाया जाएगा।

इधर भाजपा की ओर से भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है। पखांजूर नगर पंचायत के उपाध्यक्ष शंकर सरकार ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नगर क्षेत्र से भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि नगर के बीच से गुजरने वाले भारी वाहन स्कूली बच्चों, राहगीरों, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से माइंस के वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की मांग भी की, ताकि नगर क्षेत्र में यातायात और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान हो सके।

वहीं कांग्रेस ने भी पहले अंजड़ी नाला स्थित क्षतिग्रस्त पुल पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। कांग्रेस ने परलकोट क्षेत्र को माइंस प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग करते हुए सड़क, पुल-पुलिया, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही के कारण क्षेत्र का आधारभूत ढांचा लगातार प्रभावित हो रहा है और इसका खामियाजा स्थानीय नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारी वाहनों के कारण आम जनता को लगातार परेशानी हो रही है और यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

लगातार बढ़ते विरोध के बीच कलेक्टर ने अपने एक दिवसीय पखांजूर दौरे के दौरान एसडीएम के साथ क्षतिग्रस्त सड़क और पुलिया का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। हालांकि निरीक्षण के बाद किसी बड़े निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

फिलहाल संयुक्त मोर्चा, भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना सहित विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही मांगों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब पूरे परलकोट क्षेत्र की निगाहें प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि भारी वाहनों के संचालन, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।