CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किया बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम-टैक्स चौथा संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किया है। इसके तहत वैल्यूअर और अधिकृत इनकम-टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए हैं। Form 169 और Form 171 के प्रारूप में संशोधन के साथ टैक्स रिकवरी और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम-टैक्स चौथा संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किया है। नए नियमों के तहत वैल्यूअर और अधिकृत इनकम-टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और टैक्स रिकवरी से संबंधित नियमों में भी संशोधन किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने गए हैं, जबकि अन्य बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किए गए हैं।
आयकर विभाग की नई अधिसूचना के तहत Form 169 और Form 171 के मौजूदा प्रारूप में आवश्यक बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार, वैल्यूअर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को Form 169 में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी और संबंधित कार्य अनुभव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए वैल्यूएशन से संबंधित विवरण भी उपलब्ध कराना होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वैल्यूअर से जुड़ी आवश्यक जानकारियों को निर्धारित प्रारूप में दर्ज करना है।
वहीं, अधिकृत इनकम-टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए Form 171 से संबंधित बदलाव किए गए हैं। इस फॉर्म के माध्यम से टैक्स प्रैक्टिशनर को अपनी शैक्षणिक योग्यता और जरूरी सर्टिफिकेट से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा यदि संबंधित व्यक्ति के संबंध में किसी तरह की डिस्क्वालिफिकेशन लागू होती है, तो उसकी जानकारी भी निर्धारित प्रारूप में देनी होगी। नए फॉर्म के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में जरूरी जानकारियों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।
CBDT के इन बदलावों में टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंप्लायंस से जुड़ी कुछ समयसीमाओं में विस्तार किया गया है। इससे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और अन्य संबंधित टैक्सपेयर्स को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलने की बात कही गई है। इससे अंतिम समय में होने वाली आपाधापी और संभावित तकनीकी या सर्वर संबंधी परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किया गया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस नियम के तहत पहले मौजूद कुछ प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इसके साथ ही पहले 30 सितंबर 2026 तक पूरी की जाने वाली कुछ प्रक्रियाओं की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 किए जाने की जानकारी दी गई है।
CBDT के चौथे संशोधन नियम, 2026 में किए गए ये बदलाव वैल्यूअर, टैक्स प्रैक्टिशनर्स और अन्य संबंधित करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि अलग-अलग प्रावधानों की प्रभावी तारीख अलग हो सकती है। इसलिए संबंधित करदाताओं और पेशेवरों के लिए अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों और लागू समयसीमा के अनुसार अनुपालन करना जरूरी होगा।